कोटपूतली-बहरोड़ (राजेश कुमार हाडिया)। ऑपरेशन ‘साइबर मुक्ति’ के तहत कोटपूतली-बहरोड़ जिला पुलिस ने अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी नेटवर्क का पर्दाफाश कर बड़ी सफलता हासिल की है। जिले की साइबर सेल और 15 पुलिस थानों की 25 से अधिक टीमों ने एक साथ दबिश देकर कंबोडिया में संचालित चीनी साइबर सिंडिकेट द्वारा भारत में किए जा रहे डिजिटल अरेस्ट, फर्जी वेबसाइट और इन्वेस्टमेंट फ्रॉड जैसे हाई-टेक अपराधों का खुलासा किया।

एसपी देवेन्द्र कुमार बिश्नोई ने प्रेस वार्ता में बताया कि कंबोडिया स्थित फर्जी कॉल सेंटरों से भारतीय नागरिकों के साथ हजारों करोड़ का साइबर फ्रॉड किया जा चुका है। राजस्थान के कोटपूतली-बहरोड़ और आसपास के जिलों से भी बड़ी संख्या में युवाओं को काम के नाम पर कंबोडिया भेजा गया, जहां उन्हें साइबर ठगी की स्क्रिप्ट व तकनीक सिखाकर फ्रॉड में लगाया गया।

ऑपरेशन के तहत बानसूर, बहरोड़, कोटपूतली, मुंडावर, मऊ, पीपली, कांसली, साथलपुर, बाबरिया, हरसौरा, फतेहपुर, बुचियावास सहित कई इलाकों में दबिश दी गई। कार्रवाई में 41 संदिग्धों को डिटेन किया गया, जिनमें से 25 को गिरफ्तार किया गया है, जबकि 15 को पूछताछ व समझाइश के बाद छोड़ दिया गया।

पूछताछ में सामने आया कि बानसूर, कोटकासिम व मुंडावर क्षेत्र के कई युवक अभी भी कंबोडिया में इस नेटवर्क से जुड़े हैं। मुख्य आरोपी सुरेश पुत्र रामदयाल सैन निवासी रामनगर (थाना बानसूर) को गिरफ्तार किया गया। सुरेश ने चीनी और कंबोडियन अपराधियों से सांठगांठ कर सैकड़ों युवाओं को वियतनाम व थाईलैंड के रास्ते कंबोडिया भेजा। वहां 15 दिन की ट्रेनिंग के बाद उन्हें चीनी संचालित कॉल सेंटरों में तैनात किया जाता था, जहां से खुद को CBI, पुलिस, ED या कस्टम अधिकारी बताकर डिजिटल अरेस्ट, शेयर ट्रेडिंग फ्रॉड, लिंक फ्रॉड और OTP ठगी की जाती थी।

जांच में खुलासा हुआ कि कंबोडिया के ऐसे फर्जी कॉल सेंटरों में भारत, पाकिस्तान, नेपाल और बांग्लादेश के करीब 1000–1500 युवक कार्यरत हैं। इन्हें 1000 डॉलर मासिक वेतन के साथ बड़े फ्रॉड पर अतिरिक्त इंसेंटिव दिया जाता है। हिंदी व अंग्रेजी दोनों भाषाओं के युवक बड़ी संख्या में शामिल पाए गए।
एसपी बिश्नोई ने आमजन से अपील की कि बिना सत्यापन किसी एजेंट पर भरोसा न करें और पासपोर्ट, वीजा, ऑफर लेटर व वर्क परमिट की वैधता अवश्य जांचें, बिना लाइसेंस एजेंटों से विदेश न जाएं, संदिग्ध एजेंट/ऑफर की सूचना तुरंत पुलिस को दें, धोखे की स्थिति में साइबर हेल्पलाइन 1930 या नजदीकी थाने से संपर्क करें।
उन्होंने कम्बोडिया, लाओस, वियतनाम, म्यांमार जैसे देशों में नौकरी के नाम पर जाने वाले युवाओं व परिजनों को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी। ऑपरेशन में साइबर सेल प्रभारी संदीप कुमार यादव का विशेष योगदान रहा। जिला पुलिस ने साफ किया कि फर्जी एजेंटों, मानव तस्करी व विदेश में बैठकर साइबर फ्रॉड में शामिल युवकों पर कार्रवाई लगातार जारी रहेगी।



