कोटपूतली-बहरोड़ जिले के ग्राम द्वारिकपुरा में कृषि विभाग के तत्वावधान में शुक्रवार को एक दिवसीय कृषक प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया। शिविर का उद्देश्य किसानों को प्राकृतिक खेती के प्रति जागरूक करना एवं रासायनिक खेती के विकल्प के रूप में टिकाऊ कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देना रहा।

प्रशिक्षण शिविर में एक्सेस डेवलपमेंट से लोकेंद्र सिंह ने किसानों को प्राकृतिक खेती के महत्व, उसके लाभ एवं व्यावहारिक तकनीकों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने जीवामृत, बीजामृत, नीमास्त्र तथा घनजीवामृत जैसे प्राकृतिक इनपुट तैयार करने की विधि, उनके उपयोग और फसलों पर पड़ने वाले सकारात्मक प्रभावों को सरल भाषा में समझाया।
शिविर में उपस्थित कृषि पर्यवेक्षक सुरज शर्मा ने किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित करते हुए इसके पर्यावरणीय, स्वास्थ्यगत एवं आर्थिक लाभों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती से न केवल लागत कम होती है, बल्कि मिट्टी की उर्वरता और फसलों की गुणवत्ता भी बेहतर होती है।
प्रशिक्षण शिविर में लगभग 40 से 50 किसानों ने भाग लिया। अंत में कृषि पर्यवेक्षक ने किसानों से आह्वान किया कि वे प्रशिक्षण में प्राप्त जानकारी को अपने खेतों में प्रयोग में लाकर प्राकृतिक खेती को सफल बनाएं और आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वस्थ पर्यावरण सुनिश्चित करें।



