सिविल न्यायालय परिसर के निर्माण कार्य में अनियमितताओं और घटिया सामग्री के उपयोग को लेकर अभिभाषक संघ पावटा ने कड़ा विरोध जताया है। संघ अध्यक्ष एडवोकेट रामनिवास यादव के नेतृत्व में मंगलवार को जिला एवं सत्र न्यायाधीश रवि शर्मा को ज्ञापन सौंपकर मामले की जांच और आवश्यक कार्रवाई की मांग की गई।

ज्ञापन में आरोप है कि न्यायालय परिसर की चारदीवारी निर्माण में मानक सामग्री का उपयोग नहीं किया जा रहा है। बजरी के स्थान पर पत्थर का बुरादा और स्क्रेप जैसी मिट्टीनुमा सामग्री का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिसमें सीमेन्ट की मात्रा भी बेहद कम बताई गई है। इससे निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
अभिभाषक संघ अध्यक्ष एडवोकेट रामनिवास यादव ने बताया कि जनवरी माह से शुरू हुआ निर्माण कार्य अब तक अधूरा पड़ा है। चारदीवारी की नींव खुदाई भी पूरी नहीं हुई है और मौके पर बेहद कम संख्या में कारीगर व मजदूर कार्यरत हैं। आरोप है कि ठेकेदार द्वारा पर्याप्त संसाधन नहीं लगाए जा रहे हैं, जिसके चलते निर्माण कार्य अत्यंत धीमी गति से चल रहा है।
संघ ने सहायक अभियन्ता (पीडब्ल्यूडी) विराटनगर पर भी लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि मौके पर नियमित निरीक्षण नहीं किया जा रहा है, जिससे ठेकेदार को मनमानी करने का अवसर मिल रहा है। ज्ञापन में ठेकेदार एवं सहायक अभियन्ता की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए गए हैं।
अभिभाषक संघ ने मांग की है कि निर्माण कार्य में उच्च गुणवत्ता की सामग्री का उपयोग सुनिश्चित किया जाए तथा पर्याप्त संख्या में कारीगर और मजदूर लगाकर कार्य को शीघ्र पूरा कराया जाए। साथ ही न्यायालय भवन के भूमि पूजन कार्यक्रम को भी जल्द से जल्द आयोजित करने की मांग की गई है, ताकि निर्माण कार्य समय पर शुरू हो सके।
संघ ने चेतावनी दी कि यदि समय रहते उचित कार्रवाई नहीं की गई तो वे आगे आंदोलन करने को मजबूर होंगे।


