निवाई क्षेत्र के करेड़ा बुजुर्ग गांव स्थित सीताराम जी मंदिर परिसर में आयोजित कंबल वितरण कार्यक्रम के दौरान उत्पन्न विवाद ने अब तूल पकड़ लिया है। टोंक के पूर्व भाजपा सांसद सुखबीर सिंह जौनापुरिया पर आरोप है कि कार्यक्रम में शामिल कुछ मुस्लिम महिलाओं को पहले कंबल दिए गए, लेकिन नाम पूछे जाने के बाद उनसे कंबल वापस ले लिए गए। इस घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें उन्हें बोलते हुए साफ देखा और सुना जा सकता है।

जानकारी के अनुसार रविवार दोपहर करीब 3:30 बजे आयोजित इस निजी कंबल वितरण कार्यक्रम में विभिन्न समुदायों की महिलाएं मौजूद थीं। पूर्व सांसद गरीब महिलाओं को कंबल वितरित कर रहे थे। इसी दौरान एक महिला से उनका नाम पूछा गया, जिसने अपना नाम सकुरान खान बताया। इसके बाद माहौल अचानक बदल गया और कथित रूप से उनसे कंबल वहीं छोड़ने को कहा गया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार पूर्व सांसद ने कहा कि यह उनका निजी कार्यक्रम है, कोई सरकारी योजना नहीं है, और जो लोग प्रधानमंत्री को गाली देते हैं, उन्हें कंबल लेने का अधिकार नहीं है। वायरल वीडियो में भी उन्हें इसी तरह की बात कहते हुए देखा जा सकता है। इस बयान के बाद कार्यक्रम स्थल पर असहज स्थिति बन गई। कुछ स्थानीय कार्यकर्ताओं ने स्थिति संभालने का प्रयास किया, लेकिन वितरण रोकने की बात भी सामने आई।
वहीं बुजुर्ग महिलाओं सकुरान, रजिया और जुबैदा जमी ने आरोप लगाया कि पहले उन्हें कंबल दे दिए गए थे, लेकिन मुस्लिम पहचान सामने आने के बाद वापस ले लिए गए। महिलाओं ने इसे अपमानजनक बताते हुए कहा कि मदद के नाम पर बुलाकर इस प्रकार का व्यवहार करना अत्यंत दुखद है।
घटना के बाद क्षेत्र में व्यापक चर्चा का माहौल है। सामाजिक संगठनों और स्थानीय लोगों का कहना है कि सहायता कार्यक्रमों में धर्म, जाति या विचारधारा के आधार पर किसी भी प्रकार का भेदभाव नहीं होना चाहिए। जरूरतमंद व्यक्ति की मदद बिना किसी भेदभाव के की जानी चाहिए, तभी समाज में सौहार्द और विश्वास कायम रह सकता है।
यह घटनाक्रम न केवल संवेदनशीलता और सामाजिक जिम्मेदारी की कसौटी पर सवाल खड़े करता है, बल्कि यह भी सोचने पर मजबूर करता है कि सार्वजनिक जीवन में समानता और समरसता के मूल्यों को व्यवहार में कैसे उतारा जाए। वायरल वीडियो के बाद इस मामले ने राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर नई बहस छेड़ दी है।


