कोटपूतली–बहरोड़ (राजेश कुमार हाडिया)। जिले के पावटा न्यायालय में न्यायिक प्रक्रिया की अभूतपूर्व मिसाल सामने आई है। न्यायिक मजिस्ट्रेट डॉ. अजय कुमार बिश्नोई ने चोरी के एक प्रकरण में आरोप पत्र प्रस्तुत होने के दिन ही संपूर्ण ट्रायल पूर्ण करते हुए अभियुक्तों को 03-03 वर्ष के कठोर कारावास एवं प्रत्येक पर ₹20,000 जुर्माने की सजा सुनाई।

यह राजस्थान का पहला मामला माना जा रहा है, जिसमें एक ही दिन में विचारण पूर्ण कर दोषियों को सजा सुनाई गई। घटना का जिक्र करते हुए अभियोजन अधिकारी डॉ. पंकज यादव ने बताया कि 06 जनवरी 2026 को परिवादी विक्रम सिंह पुत्र उम्मेद सिंह, श्योपाल सैनी, ईश्वर सैनी एवं अंकित सिंघल ने पुलिस थाना प्रागपुरा में रिपोर्ट दर्ज कराई।

रिपोर्ट के अनुसार 05 जनवरी 2026 की मध्यरात्रि को अज्ञात चोरों ने प्रागपुरा बड़ी पुलिया के पास नारायणपुर मोड़ पर स्थित हरिओम जनरल स्टोर, श्री श्याम मिष्ठान भंडार, एम.एस. मोबाइल सेंटर और मानवी हेल्थ केयर के शटरों के ताले तोड़कर दुकानों में रखी नगदी चोरी कर ली।
प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए पुलिस थाना प्रागपुरा ने त्वरित जांच करते हुए 27 जनवरी 2026 को अभियुक्तगण
विजयपाल पुत्र ओमप्रकाश, निवासी गण्डाला, कपिल पुत्र जयसिंह, निवासी गण्डाला और राजेश पुत्र हरिराम, निवासी फतेहपुरा (तीनों थाना नीमराणा क्षेत्र) को गिरफ्तार किया। इसके पश्चात 29 जनवरी 2026 को आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया गया।
न्यायालय के पीठासीन अधिकारी डॉ. अजय कुमार बिश्नोई ने आरोप पत्र प्रस्तुत होते ही त्वरित सुनवाई करते हुए अभियोजन पक्ष के 07 साक्षियों के बयान तथा 50 दस्तावेजों को प्रदर्शित कर विचारण पूर्ण किया और उसी दिन दोष सिद्ध मानते हुए अभियुक्तों को कठोर कारावास की सजा सुनाई।
न्यायालय की इस कार्यवाही को लेकर अधिवक्ताओं और आमजन में चर्चा है कि यह फैसला बताता है कि यदि जांच, अभियोजन और न्यायालय समन्वय से कार्य करें, तो न्याय में देरी नहीं बल्कि न्याय की गति संभव है।
उल्लेखनीय है कि नव नियुक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश रवि शर्मा द्वारा चोरी, लूट एवं संपत्ति संबंधी अपराधों में शीघ्र निर्णय सुनिश्चित करने हेतु समस्त न्यायिक अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं। पावटा न्यायालय का यह निर्णय उन्हीं निर्देशों की प्रभावी परिणति के रूप में देखा जा रहा है।
इस ऐतिहासिक फैसले के बाद कोटपूतली–बहरोड़ जिले में सक्रिय चोर गिरोहों में भय का माहौल है, वहीं आमजन में न्याय व्यवस्था के प्रति विश्वास और अधिक मजबूत हुआ है।



