पावटा कस्बे में राष्ट्रव्यापी पंजीकृत साहित्यिक संस्था आजाद कलम ट्रस्ट के तत्वावधान में मूंगाजी कॉम्प्लेक्स स्थित आर्यभट्ट कोचिंग संस्थान में भव्य आजाद कलम कवि सम्मेलन एवं सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। साहित्यिक वातावरण से सराबोर इस कार्यक्रम में दूर-दराज से पधारे कवि-कवयित्रियों ने अपनी सशक्त और भावपूर्ण रचनाओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

कार्यक्रम का शुभारंभ संस्था के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष एवं मीडिया प्रभारी धर्मेन्द्र कुमार धर्मी, प्रांतीय सचिव राजकुमार राज तथा उपस्थित वरिष्ठ कवियों द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। इसके पश्चात वरिष्ठ कवि गिरिराज शास्त्री ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत कर कार्यक्रम को आध्यात्मिक और काव्यमय शुरुआत दी।

कवि सम्मेलन में विभिन्न क्षेत्रों से आए 40 से अधिक कवि-कवयित्रियों ने श्रृंगार, ओज, करुण, सामाजिक चेतना, आध्यात्मिकता और देशभक्ति जैसे विविध विषयों पर प्रभावशाली काव्यपाठ प्रस्तुत किया। कवियों की मार्मिक और ओजपूर्ण प्रस्तुतियों पर श्रोताओं की गूंजती तालियों ने पूरे माहौल को काव्यमय बना दिया।

इस अवसर पर कुमार धर्मी ने अपने संबोधन में संस्था के उद्देश्यों, साहित्यिक गतिविधियों और रचनात्मक दिशा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आजाद कलम ट्रस्ट साहित्य के माध्यम से समाज में सकारात्मक चेतना और जागरूकता का संचार करने का कार्य कर रहा है। उन्होंने अपने काव्यपाठ से भी श्रोताओं को भावविभोर कर दिया।

करीब पांच घंटे तक चले इस भव्य साहित्यिक आयोजन में श्रोताओं की निरंतर उपस्थिति और प्रत्येक रचनाकार को धैर्यपूर्वक सुनना साहित्य के प्रति लोगों की गहरी रुचि और सम्मान को दर्शाता रहा। कार्यक्रम में महिलाओं की उल्लेखनीय भागीदारी ने भी आयोजन की गरिमा को और अधिक बढ़ा दिया।

कार्यक्रम संयोजक अनिल आजाद के नेतृत्व में आयोजित इस सफल आयोजन में आर्यभट्ट कोचिंग संस्थान के संस्थापक सुरेश सिंह शेखावत का विशेष सहयोग रहा। तकनीकी सहयोग में कैमरामैन बबलू बाकोलिया, देवेश स्टूडियो के मुरलीधर कुमावत तथा साउंड व्यवस्था में जितेंद्र सेन का योगदान सराहनीय रहा। वहीं अल्पाहार व्यवस्था में विशेष शर्मा और उमेश चंद्र ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

कार्यक्रम का प्रभावशाली मंच संचालन सुनील कालोलिया और सनी लाखीवाल ने किया, जिससे पूरा आयोजन अनुशासित और रोचक बना रहा। अंत में आयोजकों ने सभी कवियों, सहयोगियों और साहित्य प्रेमियों का आभार व्यक्त करते हुए साहित्य की इस परंपरा को निरंतर आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।



