प्रागपुरा कस्बे में राष्ट्रीय राजमार्ग से जुड़े 75 मीटर नियम को लेकर मुस्लिम समुदाय में गहरी चिंता व्याप्त है। शुक्रवार को कस्बे के मुस्लिम समाज के लोगों ने प्रागपुरा शाही जामा मस्जिद के सदर आमीन मंसूरी के नेतृत्व में पावटा एसडीएम डॉ. साधना शर्मा को ज्ञापन सौंपकर अपनी आशंकाओं से अवगत कराया।

ज्ञापन में बताया गया कि प्रागपुरा हाइवे के निकट स्थित बाबा हजरत मोहम्मद कबिरूद्दीन शाह मस्जिद एवं दरगाह स्थल राजस्थान उच्च न्यायालय, जोधपुर की मुख्यपीठ द्वारा निर्धारित राष्ट्रीय राजमार्ग के केंद्र बिंदु से 75 मीटर की परिधि के दायरे में आ रहा है। समुदाय का कहना है कि यदि न्यायालय के आदेशों की पालना में दरगाह स्थल की भूमि प्रभावित होती है, तो भविष्य में शवों को दफनाने के लिए पर्याप्त स्थान का अभाव उत्पन्न हो जाएगा।
सदर आमीन मंसूरी ने कहा कि यह स्थल केवल धार्मिक आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि वर्षों से समुदाय की सामाजिक और धार्मिक परंपराओं से जुड़ा स्थान है। उन्होंने कहा, “यदि यह जगह चली जाती है तो हमारे सामने दफनाने के लिए भी पर्याप्त भूमि नहीं बचेगी। यह केवल जमीन का नहीं, हमारी परंपरा और अस्मिता का प्रश्न है।” उन्होंने प्रशासन से मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए समुदाय की भावनाओं को ध्यान में रखने की अपील की।
प्रागपुरा कि पूर्व सरपंच एलन स्वामी ने भी समुदाय की चिंता को उचित बताते हुए कहा कि क्षेत्र में पहले से ही सार्वजनिक उपयोग की भूमि सीमित है। यदि दरगाह स्थल प्रभावित होता है तो मुस्लिम समाज के पास वैकल्पिक स्थान उपलब्ध कराना आसान नहीं होगा। भविष्य में यह सामाजिक असंतोष का कारण बन सकता है।
उन्होंने प्रशासन से आग्रह किया कि किसी भी कार्रवाई से पहले सर्वे, संवाद और वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। ज्ञापन सौंपने के दौरान मुस्तफा लुहार, समीर लुहार, असलम शेख फारूकी, अमर सिंह आर्य, इस्लामुद्दीन, इमरान लुहार, महमूद खां, सोहिल खान बटीयारा सहित अन्य समाजजन भी मौजूद रहे।
समुदाय के लोगों ने स्पष्ट किया कि वे न्यायालय के आदेशों का सम्मान करते हैं, लेकिन प्रशासन से यह अपेक्षा रखते हैं कि प्रभावित स्थल की स्थिति पर पुनर्विचार करते हुए धार्मिक एवं मानवीय पहलुओं को प्राथमिकता दी जाए।
मुस्लिम समाज ने मांग की है कि यदि किसी कारणवश भूमि प्रभावित होती है तो पहले वैकल्पिक भूमि चिन्हित कर उसे विधिवत समुदाय को उपलब्ध कराया जाए, ताकि भविष्य में दफन प्रक्रिया और धार्मिक गतिविधियों में कोई बाधा उत्पन्न न हो।



