पावटा (राजेश कुमार हाडिया)। राष्ट्रीय राजमार्ग-48 और आसपास के शहरी-ग्रामीण क्षेत्रों में पिछले कुछ वर्षों से तेजी से बढ़ रहे ओयो होटल, कैफे और छोटे लॉज व्यवसाय अब सामाजिक बहस का विषय बन गए हैं।

स्थानीय अभिभावकों एवं नागरिकों ने आरोप लगाए हैं कि कई इकाइयाँ बिना उचित लाइसेंस, बिना पहचान सत्यापन और बिना निगरानी के संचालित हो रही हैं, जिससे क्षेत्र में अनैतिक गतिविधियाँ, सुरक्षा खतरे एवं किशोर-वर्ग पर विपरीत प्रभाव को लेकर चिंता बढ़ी है।
अभिभावकों का कहना है कि सुबह और दोपहर के समय कई ओयो एवं कैफे में युवा लड़के-लड़कियों की संदिग्ध गतिविधियाँ देखी जाती हैं। स्थानीय लोगों ने कहा कि इस तरह का कल्चर विद्यालयों और कोचिंग संस्थानों के छात्रों को भटका रहा है। कई परिवारों का दावा है कि सोशल मीडिया और छुपे हुए संपर्कों के चलते कुछ युवाओं द्वारा घर से बिना बताकर लव मैरिज व भागकर विवाह जैसे मामले भी सामने आए हैं।
ग्रामीणों का मानना है कि यह मामला केवल नैतिकता या सामाजिक दृष्टिकोण का नहीं बल्कि कानूनी और प्रशासनिक प्रोटोकॉल का है। होटल व ओयो संचालन के लिए पहचान सत्यापन (KYC), CCTV निगरानी, विजिटर रजिस्टर, पुलिस इंटिमेशन, फायर NOC और लाइसेंस अनिवार्य होता है। लेकिन स्थानीय स्तर पर इन मानकों को लेकर लापरवाही व शिथिलता की शिकायतें गंभीर स्वर में उठ रही हैं।
सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि क्षेत्र में बढ़ते ओयो कल्चर पर नियंत्रण के लिए कानूनी निरीक्षण व लाइसेंसिंग, युवाओं के लिए मार्गदर्शन व काउंसलिंग, सुरक्षा व प्रोटोकॉल की सख्त मॉनिटरिंग व्यवस्था अत्यंत आवश्यक है।
अभिभावकों ने पुलिस, नगर पालिका और जिला प्रशासन से संयुक्त निरीक्षण अभियान चलाने, बिना अनुपालन संचालित इकाइयों को सील करने और विद्यार्थियों पर विपरीत प्रभाव रोकने के लिए निगरानी बढ़ाने की मांग उठाई है।
स्थानीय निवासियों का मत है कि यदि व्यवस्था पारदर्शी, कानूनी और सुरक्षित रूप में लागू की जाए तो होटल व्यवसाय को लाभ होगा और समाज में अनुशासन भी कायम रहेगा।


