अस्पताल ने जिसे कफन लपेटकर मृत्यु का सर्टिफिकेट दिया, बकौल परिजन ‘वह 3 घंटे जिंदा रही’

न्यूज़ चक्र, कोटपूतली। कोटपूतली के राजकीय बीडीएम जिला अस्पताल से अक्सर ‘लापरवाह इलाज’ के वीडियो सामने आते रहे हैं। यहां तक कि अस्पताल की इमरजेंसी में एक वार्ड बॉय द्वारा मरीज के टांके लगाने का वीडियो भी काफी वायरल हुआ था। … और अब अस्पताल की उसी इमरजेंसी के एक डॉक्टर पर मरीज को ‘ठीक’ से ना देखने का आरोप है। अस्पताल की इमरजेंसी में आज रविवार, सुबह 8:00 बजे गांव द्वारिकपुरा से एक 12 साल की बच्ची को लेकर पहुंचे परिजनों ने आरोप लगाया है कि डॉक्टर ने जिंदा बच्ची को मृत घोषित कर डेथ सर्टिफिकेट बना दिया। बकौल परिजन डेथ सर्टिफिकेट बनने के बाद बच्ची 3 घंटे जिंदा रही और इसके बाद गांव द्वारिकपुरा से वापस कोटपूतली लाते समय रास्ते में दम तोड़ दिया। जिसे बाद में परिजन पल्स अस्पताल लेकर गए जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। अब यह हकीकत है या गलतफहमी… जांच का विषय हो सकता है… क्या कुछ है पूरा मामला …पढ़िए विस्तार से…

सोशल मीडिया पर पोस्ट वायरल


इधर घटना की जानकारी जैसे ही लोगों को लगी, किसी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट डाल दी और फिर लोगों ने अस्पताल प्रबंधन की खिंचाई करनी शुरू कर दी। लेकिन गौर करने वाली बात यह है कि पोस्ट पर कमेंट करने वालों में किसी ने भी घटना से संबंधित जानकारी जुटाना मुनासिब नहीं समझा और जिसको जो अच्छा लगा पोस्ट करता चला गया।

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अस्पताल प्रबंधन ने कहा, अस्पताल पहुंचने से पहले हो चुकी थी, बच्ची की मृत्यु

इधर अस्पताल प्रबंधन ने न्यूज़ चक्र को जानकारी देते हुए बताया कि आज सुबह करीब 8:00 बजे अस्पताल की इमरजेंसी में परिजन एक बच्ची को मृत अवस्था में लेकर अस्पताल पहुंचे थे। जिसकी गहनता से जांच की गई थी, ईसीजी की गई थी, जिससे बच्ची की मृत्यु की पुष्टि होने के बाद ही डेथ सर्टिफिकेट दिया गया था। अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि अक्सर मृत देह को नहलाने की प्रक्रिया के समय परिजनों को यह आभास होता है कि उसमें सांस है या वह जिंदा है। संभवत: इस मामले में भी ऐसा ही हुआ है। हालांकि परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन से अभी इस संबंध में कोई शिकायत या बात नहीं की है।

परिजनों ने बताया, 2 दिन से बुखार था

न्यूज़ चक्र से बातचीत में परिजनों ने बताया कि तमन्ना पुत्री हेमराज वर्मा, उम्र 12 साल, निवासी द्वारिकपुरा को पिछले 2 दिन से बुखार था, जिसका इलाज चल रहा था। आज फिर तबीयत खराब होने पर पावटा अस्पताल लेकर गए थे, जहां से ज्यादा तबीयत बिगड़ने पर कोटपूतली के राजकीय बीडीएम जिला अस्पताल लेकर आए थे जहां डॉक्टरों ने बच्ची को मृत घोषित कर दिया और डेथ सर्टिफिकेट बना दिया। परिजनों का आरोप है कि बच्ची की ठीक से जांच कर इलाज शुरू किया गया होता तो बच्ची अब जिंदा होती।

हालांकि परिजनों ने अभी अस्पताल प्रबंधन को कोई शिकायत नहीं दी है। सोशल मीडिया पर वायरल पोस्ट के बाद न्यूज़ चक्र ने परिजनों व अस्पताल प्रबंधन से बात कर मामले की हकीकत आप तक पहुंचाई है।

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  • Vikas Verma

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