भारत–अमेरिका प्रस्तावित ट्रेड डील को लेकर जारी राष्ट्रीय बहस के बीच कांग्रेस नेता एडवोकेट देवांश सिंह ने केंद्र सरकार से समझौते के सभी प्रावधान सार्वजनिक करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि यदि किसी भी स्तर पर कृषि, डेयरी या किसानों से जुड़े हितों से समझौता हुआ, तो यह करोड़ों किसानों के भविष्य के साथ अन्याय होगा।

देवांश सिंह ने कहा कि अमेरिका अपने किसानों को भारी सब्सिडी देता है, जिससे वहां के कृषि उत्पाद कम लागत में तैयार होते हैं। यदि आयात शुल्क में बड़ी कटौती या शून्य करने जैसे कदम उठाए गए, तो भारतीय बाजार सस्ते विदेशी उत्पादों से भर सकता है। इसका सीधा असर छोटे और सीमांत किसानों पर पड़ेगा, जो पहले ही लागत, मौसम और बाजार की चुनौतियों से जूझ रहे हैं। उन्होंने सरकार से स्पष्ट करने को कहा कि कृषि और डेयरी जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को किस प्रकार सुरक्षित रखा गया है।
उन्होंने कहा कि ट्रेड डील का पूरा दस्तावेज सार्वजनिक किए बिना केवल दावों के आधार पर भरोसा करना उचित नहीं है। संसद और देश की जनता के सामने समझौते का विस्तृत विवरण रखा जाना चाहिए, ताकि किसानों और आमजन में व्याप्त आशंकाओं का समाधान हो सके।
देवांश सिंह ने हालिया घटनाक्रम का उल्लेख करते हुए कहा कि अमेरिका द्वारा भारत पर लगाए गए 25% अतिरिक्त दंडात्मक टैरिफ को हटाए जाने के साथ एक ‘निगरानी तंत्र’ स्थापित करने की बात सामने आई है, जो यह देखेगा कि भारत ऊर्जा आयात के संदर्भ में किन स्रोतों से खरीद करता है। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रावधानों के बीच यह और भी आवश्यक हो जाता है कि सरकार पारदर्शिता बरते और देशहित से जुड़े सभी पहलुओं पर खुलकर जानकारी दे।
उन्होंने कहा, व्यापारिक संबंधों का विस्तार स्वागतयोग्य है, लेकिन यह विस्तार किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की कीमत पर नहीं होना चाहिए। देशहित में यह जरूरी है कि किसी भी समझौते से पहले किसान हित सर्वोपरि रखे जाएं।



