पावटा (राजेश कुमार हाडिया)। तहसील से करीब 5 किलोमीटर दूर भौनावास स्थित बागौरी की ढाणी में 2200 फीट ऊंची पहाड़ी पर विराजमान बागौरी माता का मंदिर क्षेत्र की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। विशेष रूप से नवरात्र के दौरान यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है और नौ दिनों तक विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है।

मंदिर तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को 600 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं, जिनमें 42 घुमावदार मोड़ आते हैं। कठिन चढ़ाई के बावजूद भक्तों की आस्था उन्हें माता के दरबार तक खींच लाती है। मंदिर में स्थापित प्रतिमा को दुर्गा माता का स्वरूप मानकर पूजा-अर्चना की जाती है।

स्थानीय बुजुर्गों के अनुसार टसकौला, भौनावास, खेलना सहित आसपास के क्षेत्रों में जब भी कोई युवक सेना में भर्ती होता है या सफलतापूर्वक ड्यूटी पूरी कर घर लौटता है, तो घरों में माता का डंका बजाकर खुशी मनाई जाती है, जो इस मंदिर की गहरी आस्था को दर्शाता है।

मंदिर तक जाने के मार्ग में पत्थरों का मजबूत रास्ता (खरंजा) भी बनाया गया है, जिससे एक निश्चित स्थान तक वाहन भी पहुंच सकते हैं। इसके आगे सीढ़ियों के माध्यम से ही मंदिर तक पहुंचा जाता है। मंदिर परिसर में प्राकृतिक रूप से बना एक छोटा कुंड भी है, जिसमें चांदी की गर्दन लगाकर माता का शीश स्थापित किया गया है और उसी की पूजा की जाती है।
मान्यता है कि प्राचीन समय में माता भक्तों को चोरी व अन्य घटनाओं से पहले ही संकेत देकर सतर्क कर देती थीं। इससे नाराज होकर चोरों ने माता की मूर्ति का शीश धड़ से अलग कर दिया, जिसके बाद से आज तक माता के शीश की ही पूजा की जा रही है।
यहां प्रतिवर्ष नवरात्र की अष्टमी को भव्य मेले का आयोजन होता है, जिसमें कुश्ती दंगल भी प्रमुख आकर्षण रहता है। इस मेले में राजस्थान सहित उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, हरियाणा, मध्यप्रदेश और उड़ीसा जैसे राज्यों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।
एडवोकेट मुरलीधर खोवाल ने कहा कि “बागौरी माता मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि यह क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान भी है, जिसे संरक्षित और विकसित किया जाना चाहिए।”
सामाजिक कार्यकर्ता मालिराम बाडिगर ने बताया कि “नवरात्र में यहां उमड़ने वाली श्रद्धालुओं की भीड़ क्षेत्र की एकता और आस्था का प्रतीक है, ऐसे धार्मिक स्थलों के विकास पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।”
वहीं आरटीआई एक्टिविस्ट बलवंत सिंह मीणा ने कहा कि “मंदिर तक बेहतर सुविधाएं और सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए, ताकि दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी न हो।”
बागौरी माता मंदिर आज भी आस्था, परंपरा और लोक विश्वास का जीवंत प्रतीक बना हुआ है, जहां हर वर्ष हजारों श्रद्धालु माथा टेकने पहुंचते हैं।



