कोटपूतली (राजेश कुमार हाडिया)। जोधपुरा संघर्ष समिति के बैनर तले जिला कलेक्ट्रेट कार्यालय के बाहर चल रहा महापड़ाव मंगलवार को दूसरे दिन भी जारी रहा। अपनी विभिन्न मांगों को लेकर ग्रामीण दिन-रात धरना स्थल पर डटे हुए हैं। भीषण गर्मी और अव्यवस्थाओं के बीच जारी इस आंदोलन में प्रशासन के प्रति ग्रामीणों का आक्रोश साफ नजर आ रहा है।

प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि धरना स्थल पर बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव है। पीने के पानी की समुचित व्यवस्था नहीं होने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। विशेष रूप से महिलाओं को शौचालय सुविधा के अभाव में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है, वहीं बुजुर्गों और बीमार व्यक्तियों के लिए भी कोई चिकित्सा सुविधा उपलब्ध नहीं कराई गई है।

ग्रामीणों का कहना है कि सोमवार को एसडीएम रामावतार मीणा द्वारा चिकित्सा टीम और एम्बुलेंस तैनात करने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन इसके बावजूद अब तक कोई व्यवस्था नहीं की गई।

मंगलवार को प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और प्रदर्शनकारियों से बातचीत कर धरना समाप्त करने की अपील की। इस दौरान एसडीएम रामावतार मीणा, तहसीलदार रामधन गुर्जर और डीएसपी राजेन्द्र कुमार बुरड़क ने ग्रामीणों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन वार्ता किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंच सकी।
सामाजिक कार्यकर्ता राधेश्याम शुक्लावास ने प्रशासन पर नाराजगी जताते हुए कहा कि यदि प्रशासन नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के आदेशों की समय पर पालना करता तो आज ग्रामीणों को आंदोलन करने की जरूरत नहीं पड़ती। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जब तक एनजीटी के निर्देशों का पालन सुनिश्चित नहीं किया जाता, तब तक महापड़ाव जारी रहेगा।
लंबी वार्ता के बाद अधिकारियों ने एनजीटी के आदेशों की पालना करवाने का आश्वासन दिया, लेकिन ग्रामीण अपनी मांगों पर अडिग रहे और “लड़ेंगे-जीतेंगे” के नारों के साथ धरना जारी रखा।
धरना स्थल पर कैलाश यादव, राधेश्याम शुक्लावास, भूपसिंह धानका, सुरेश कुमार शर्मा, प्रभूदयाल गुरुजी, धर्मपाल यादव, रामनिवास योगी, रोहिताश, राकेश शर्मा, सतपाल यादव, राजपाल यादव, जीतू डायमंड, धर्मपाल योगी, सुंदरलाल यादव, रामू सरपंच, मोहर सिंह योगी, मूलायम सिंह यादव, हरिराम यादव सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण एवं महिलाएं मौजूद रहीं।



