कोटपूतली-बहरोड़ (राजेश कुमार हाडिया)। प्रागपुरा थाना इन दिनों अपने नवीन और आकर्षक स्वरूप के कारण चर्चा का विषय बना हुआ है। थानाप्रभारी भजनाराम ने 18 नवंबर 2025 को पदभार ग्रहण करने के पश्चात थाने के समग्र सौंदर्यकरण व व्यवस्था सुधार हेतु एक व्यवस्थित अभियान प्रारंभ किया, जिसे भामाशाहों से प्राप्त आर्थिक सहयोग ने और गति प्रदान की।

सीआई भजनाराम के कार्यभार ग्रहण से पूर्व परिसर में पकड़ी गई गाड़ियों से लेकर कबाड़ तक कई वस्तुएँ अव्यवस्थित रूप से बिखरी रहती थीं। थाने व चारदीवारी पर रंग–रोगन के अभाव में भवन फीका व अनाकर्षक प्रतीत होता था। परिसर की स्थिति अवांछित कचरे व असुविधाजनक परिवेश के कारण नागरिकों व कर्मचारियों के लिए भी परेशानी का विषय बनी हुई थी।

इन परिस्थितियों को देखते हुए थानाप्रभारी ने सौंदर्यकरण अभियान के तहत एक-एक कर सभी व्यवस्थाओं को चुस्त-दुरुस्त करवाया। भामाशाहों के सहयोग से थाना भवन व सम्पूर्ण चारदीवारी पर पेंट व कलर कार्य, मैस व विभिन्न स्थानों पर टीनशेड, लोहे के एंगल, स्वागत कक्ष में नई टेबल व सोफे, तथा परिसर में 100 एमएम के सीमेंटेड ब्लॉक बिछाए गए, जिससे परिसर अब अनुशासित, स्वच्छ व आकर्षक दिखाई देता है।

थाने में सजावटी गमले युक्त पौधे, डाइनिंग टेबल तथा मैस हेतु छायादार टीनशेड जैसी व्यवस्थाओं ने सौंदर्यकरण को और निखारा। इसके अतिरिक्त पकड़ी गई गाड़ियों को भी सुव्यवस्थित ढंग से निर्धारित स्थान पर खड़ा करवाकर अव्यवस्था को समाप्त किया गया।

इस अभियान में स्थानीय भामाशाहों ने थानाधिकारी की प्रेरणा से करीब 10 लाख रुपये से अधिक का आर्थिक सहयोग प्रदान किया, जिससे संपूर्ण कार्य बिना किसी शासकीय बजट के पूर्ण हो सका। यह सहयोग न केवल समाज सेवा व जनसहभागिता का उत्कृष्ट उदाहरण है, बल्कि पुलिस-जन संबंधों को भी सुदृढ़ करने वाली पहल साबित हुआ है।

गौरतलब है कि प्रागपुरा थाना परिसर की तर्ज पर पावटा चौकी की चारदीवारी व सौंदर्यकरण हेतु विधायक कोटे से 10 लाख रुपये का सैंक्षन करवाया गया है। इसकी राशि नगरपालिका पावटा-प्रागपुरा के माध्यम से स्वीकृत हो चुकी है तथा जल्द ही कार्य प्रारंभ किए जाने की तैयारी है। इससे क्षेत्र में पुलिस परिसरों की छवि और अधिक सुदृढ़ व व्यवस्थित होने की उम्मीद जताई जा रही है।
निस्संदेह थानाध्यक्ष भजनाराम की नेतृत्व क्षमता, प्रशासनिक दृष्टिकोण व सकारात्मक सोच के साथ भामाशाहों का सहयोग इस बात का प्रमाण है कि यदि संकल्प व प्रयास मजबूत हों तो सरकारी संस्थानों को भी सुसज्जित और व्यवस्थित स्वरूप में परिवर्तित किया जा सकता है। स्थानीय स्तर पर इस पहल की खूब सराहना की जा रही है और यह अन्य थानों व सरकारी कार्यालयों के लिए एक प्रेरक मॉडल साबित हो रही है।




