भारत सरकार द्वारा लागू किए गए यूजीसी से संबंधित कानून के विरोध में सोमवार को पावटा कस्बे में सवर्ण समाज के लोगों ने इसे ‘काला कानून’ बताते हुए रैली निकालकर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए कानून को वापस लेने की मांग की।

प्रदर्शनकारी घंटाघर के पास स्थित रामलीला मैदान में एकत्रित हुए, जहां से रैली प्रारंभ होकर मुख्य बाजार से होते हुए कस्बे की छोटी पुलिया के रास्ते उपखंड कार्यालय पहुंची। इस दौरान क्षत्रिय, ब्राह्मण, बनिया सहित सामान्य वर्ग के विभिन्न संगठनों से जुड़े लोगों ने संयुक्त मंच के बैनर तले एकजुट होकर इस कानून का विरोध जताया।

रैली में शामिल लोगों ने हाथों में तख्तियां और बैनर लेकर यूजीसी के नियमों के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की। इसके बाद स्वर्ण समाज के प्रतिनिधिमंडल ने उपखंड कार्यालय पहुंचकर राष्ट्रपति के नाम एक ज्ञापन पावटा उपखंड अधिकारी डॉ. साधना शर्मा को सौंपा। ज्ञापन में सवर्ण समाज के हितों की रक्षा के लिए स्वर्ण आयोग के गठन की भी मांग की गई।

इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि यह यूजीसी कानून सवर्ण समाज के अधिकारों और हितों के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि सरकार एक ओर समानता और समता की बात करती है, वहीं दूसरी ओर ऐसे कानून लागू कर समाज के एक वर्ग के साथ अन्याय कर रही है।
वक्ताओं ने सरकार से इस कानून को तुरंत वापस लेने की मांग करते हुए चेतावनी दी कि यदि इसे वापस नहीं लिया गया तो सवर्ण समाज चरणबद्ध आंदोलन करने के लिए मजबूर होगा।
प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में सवर्ण समाज के लोग मौजूद रहे और उन्होंने एकजुट होकर अपने अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखने का संकल्प लिया।



