नगरपालिका पावटा-प्रागपुरा क्षेत्र सहित कोटपूतली-बहरोड़ जिले में राष्ट्रीय राजमार्ग किनारे बने अवैध और व्यावसायिक निर्माणों पर बड़ी कार्रवाई की तैयारी शुरू हो गई है। राजस्थान उच्च न्यायालय के सख्त निर्देशों के बाद जिला प्रशासन पूरी तरह सक्रिय हो गया है। अदालत ने ‘सेफ्टी ओवर प्रॉपर्टी’ सिद्धांत को सर्वोपरि मानते हुए राष्ट्रीय राजमार्ग के केंद्र बिंदु से 75 मीटर की परिधि में स्थित अवैध निर्माणों को चिन्हित कर हटाने के आदेश दिए हैं।

यह आदेश हिम्मत सिंह गहलोत बनाम राज्य सरकार प्रकरण की सुनवाई के दौरान पारित हुआ। खंडपीठ के न्यायाधीश डॉ. पुष्पेंद्र सिंह भाटी और न्यायाधीश संदीप शाह ने स्पष्ट किया कि हाईवे के राइट ऑफ वे में किया गया अतिक्रमण केवल नियमों का उल्लंघन नहीं, बल्कि सड़क पर चलने वाले नागरिकों के जीवन के अधिकार से जुड़ा गंभीर विषय है।
न्यायालय ने राज्य सरकार को दो माह के भीतर ऐसे निर्माणों को हटाने अथवा नियमानुसार स्थानांतरित करने के निर्देश दिए हैं। पूर्व में एक धर्मकांटा के पास हुए हादसे, जिसमें चार लोगों की मौत हुई थी, का उल्लेख करते हुए कोर्ट ने कहा कि प्रतिबंधित क्षेत्र में निर्माण दुर्घटनाओं का जोखिम कई गुना बढ़ा देता है।
राजमार्ग प्राधिकरण के प्रावधानों के अनुसार 0 से 45 मीटर तक किसी भी प्रकार का निर्माण पूर्णतः प्रतिबंधित है। 45 से 75 मीटर तक सीमित आवासीय निर्माण की अनुमति हो सकती है, लेकिन व्यावसायिक गतिविधियों पर पूर्ण रोक रहेगी। 75 मीटर की सीमा के भीतर आने वाले सभी व्यावसायिक निर्माण अवैध माने जाएंगे, भले ही पूर्व में कोई अनुमति दी गई हो। भूमि का स्वामित्व निजी व्यक्तियों के पास होने के बावजूद उसका उपयोग हाईवे सुरक्षा मानकों के अनुरूप नियंत्रित रहेगा।
जिला कलेक्टर प्रियंका गोस्वामी ने एसडीएम, तहसीलदारों एवं संबंधित विभागों को संयुक्त सर्वे कर 75 मीटर सीमा के भीतर आने वाले निर्माणों का चिन्हांकन करने के निर्देश दिए हैं। सार्वजनिक निर्माण विभाग और नेशनल हाईवे प्राधिकरण की टीमें सीमांकन की तैयारी में जुट चुकी हैं। अवैध निर्माणों की पहचान के लिए निजी सर्वे एजेंसी से अनुबंध की भी तैयारी बताई जा रही है।
भविष्य में किसी भी भूमि रूपांतरण में बिल्डिंग लाइन और कंट्रोल लाइन का स्पष्ट उल्लेख अनिवार्य किया गया है। एनएचएआई व संबंधित विभागों की वैध एनओसी के बिना कोई नया व्यावसायिक, औद्योगिक या आवासीय रूपांतरण स्वीकृत नहीं किया जाएगा।
पावटा उपखंड व नगरपालिका पावटा-प्रागपुरा क्षेत्र में वर्षों से संचालित ढाबे, होटल, दुकानें और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठान इस कार्रवाई की जद में आ सकते हैं। संभावित ध्वस्तीकरण को लेकर व्यापारियों व स्थानीय निवासियों में असमंजस और चिंता का माहौल है।
लोगों के मन में सवाल उठ रहे हैं—क्या 75 मीटर क्षेत्र पूरी तरह नेशनल हाईवे प्राधिकरण की भूमि है या निजी भूमि भी इसमें शामिल है? यदि अधिग्रहण हुआ था तो मुआवजा क्यों नहीं मिला? वर्षों से चल रहे प्रतिष्ठानों के हटने पर आजीविका का क्या होगा?
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि सड़क सुरक्षा सर्वोपरि है और नियम-विरुद्ध निर्माण किसी भी स्तर की अनुमति के बावजूद अवैध माने जाएंगे। हालांकि, इस निर्णय से हजारों लोगों के मकान, दुकानें और रोजगार प्रभावित होने की संभावना से पूरे क्षेत्र में हलचल तेज हो गई है। आने वाले दिनों में प्रशासनिक सख्ती के साथ बड़े स्तर पर कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।


