मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के निर्देशानुसार प्रत्येक गिरदावर सर्किल में आयोजित किए जा रहे ग्राम उत्थान शिविरों का उद्देश्य किसानों और ग्रामीणों को सरकारी सेवाएं गांव के नजदीक उपलब्ध कराना है। इसी क्रम में सोमवार, 9 फरवरी को पावटा उपखंड के गिरदावर सर्किल प्रागपुरा में ग्रामीण उत्थान शिविर आयोजित किया गया, लेकिन यह शिविर व्यवस्थाओं और सूचना अभाव के चलते औपचारिकता बनकर रह गया।

ग्रामीणों का कहना रहा कि शिविर की पूर्व सूचना गांवों तक नहीं पहुंचाई गई, जिसके कारण वास्तविक लाभार्थी मौके पर नहीं पहुंच सके। जो कुछ लोग जानकारी मिलने पर पहुंचे भी, वे स्वयं से सम्बन्धित अधिकारियों की अनुपस्थिति देखकर निराश लौटते नजर आए। शिविर स्थल पर न तो उपखंड अधिकारी डॉ. साधना शर्मा और न ही तहसीलदार लोकेन्द्र कुमार मीणा की उपस्थिति दिखी।

मौके पर मौजूद कर्मचारी भी दिनभर निष्क्रिय बैठे दिखाई दिए। शिविर स्थल पर छाया, पेयजल या बैठने जैसी बुनियादी व्यवस्थाएं भी नहीं थीं। कई ग्रामीण यह पूछते नजर आए कि आखिर यह शिविर किस उद्देश्य से लगाया गया है, लेकिन स्पष्ट जानकारी न मिलने से भ्रम की स्थिति बनी रही।

ग्राम उत्थान शिविरों का मूल उद्देश्य राजस्व, कृषि, सामाजिक सुरक्षा, पेंशन, पट्टा, नामांतरण, प्रमाण पत्र, बीमा, बैंकिंग, जल संसाधन, पशुपालन और अन्य विभागों की सेवाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध कराना होता है, ताकि ग्रामीणों को बार-बार कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें। लेकिन प्रागपुरा में आयोजित यह शिविर इन उद्देश्यों पर खरा उतरता नजर नहीं आया।
ग्रामीणों ने मांग की है कि ऐसे शिविरों की पूर्व सूचना ग्राम स्तर तक प्रभावी ढंग से दी जाए, जिम्मेदार अधिकारी मौके पर मौजूद रहें और मूलभूत सुविधाओं की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि इन शिविरों का वास्तविक लाभ आमजन तक पहुंच सके।



