पावटा (राजेश कुमार हाडिया)। किरतपुरा की ढाणी बड़ियाली में तीन वर्षीय मासूम चेतना की खुले बोरवेल में गिरकर हुई दर्दनाक मौत को अभी एक वर्ष भी नहीं गुजरा, लेकिन कोटपूतली-बहरोड़ जिला प्रशासन ने उस हादसे से कोई सबक नहीं लिया है। जिले में आज भी खुले कुएं और बोरवेल मौत के फंदे बने हुए हैं, जिन पर नगरपालिका पावटा-प्रागपुरा और पावटा उपखंड प्रशासन की अनदेखी और उदासीनता साफ दिखाई देती है।

ताजा मामला पावटा-प्रागपुरा नगरपालिका क्षेत्र के प्रागपुरा शहरी इलाके में स्थित प्राचीन नागाजी मंदिर के पास ढाणी ज्याजावाली का है, जहां लगभग 125 फीट गहरा खुला कुआं लंबे समय से खतरे के रूप में मौजूद है। 5 जनवरी को इसी कुएं में एक निराश्रित गौवंश गिर गया, जो लगातार तीन दिनों तक कुएं में दर्द से तड़पता और कराहता रहा, लेकिन नगरपालिका व पावटा उपखंड प्रशासन को न तो तत्काल रेस्क्यू कराने की फुर्सत रही और न ही कोई त्वरित कार्रवाई की गई। चौथे दिन गुरुवार को गौवंश ने तड़प-तड़प कर दम तोड़ दिया।

शर्मनाक तथ्य यह रहा कि गौवंश की मौत के बाद नगरपालिका ने जेसीबी मौके पर भेजी, जहां मृत गौवंश को कुएं से बाहर निकालने की बजाय वही कुएं में मिट्टी डालकर दफन कर दिया गया। इस कृत्य ने न केवल प्रशासनिक संवेदनहीनता को उजागर किया बल्कि जिम्मेदारी के सवाल भी खड़े कर दिए।

गौरतलब है कि चेतना की मौत के बाद प्रशासन ने जिले के सभी खुले बोरवेल और कुओं को चिन्हित कर सुरक्षित करने के दावे किए थे, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि आज भी ऐसे खतरनाक खुले कुएं व बोरवेल जानवरों और मानव जीवन दोनों को खतरे में डाल रहे हैं। यदि यह कुआं समय रहते बंद या सुरक्षित किया जाता, तो न तो गौवंश की यह दर्दनाक मौत होती और न ही लोग प्रशासन को कोसते।

स्थानीय नागरिकों और गौसेवकों ने कहा कि नगरपालिका पावटा-प्रागपुरा व पावटा उपखंड प्रशासन की संवेदनहीनता और लापरवाही का यह ताजा उदाहरण है। उन्होंने मांग की है कि जिले में मौजूद सभी खुले कुओं व बोरवेल का सर्वे कर उन्हें तत्काल सुरक्षित व बंद किया जाए, जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए तथा इस मामले में नगरपालिका व उपखंड प्रशासन की लापरवाही की जांच कराई जाए, ताकि भविष्य में किसी और मासूम या बेजुबान की जान ऐसे हादसों में न जाए। स्थानीय लोगों व गौसेवकों ने मौके पर नारेबाजी कर प्रशासन के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया।



