नवगठित कोटपूतली-बहरोड़ जिले के मुख्यालय कोटपूतली में राजकीय विधि महाविद्यालय स्वीकृत कर शीघ्र संचालन शुरू करने की मांग को लेकर जिला अभिभाषक संघ, कोटपूतली के पूर्व अध्यक्ष एडवोकेट उदय सिंह तंवर ने राज्य सरकार को पत्र प्रेषित किया है।

तंवर ने मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा, वित्त मंत्री एवं उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी, उच्च शिक्षा मंत्री एवं उपमुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा तथा कानून मंत्री जोगाराम पटेल को पत्र लिखकर इस मांग पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेने का आग्रह किया है। साथ ही इस संबंध में जयपुर ग्रामीण सांसद राव राजेन्द्र सिंह, कोटपूतली विधायक हंसराज पटेल, विराटनगर विधायक कुलदीप धनकड़ तथा बानसूर विधायक देवीसिंह शेखावत को भी अनुशंसा हेतु पत्र भेजा गया है।
उल्लेखनीय है कि नवगठित जिले में जिला अभिभाषक संघ के गठन के बाद एडवोकेट तंवर के नेतृत्व में ही गत वर्ष कोटपूतली मुख्यालय पर डीजे कोर्ट एवं समकक्ष न्यायालयों की स्थापना को लेकर व्यापक आंदोलन किया गया था। लगभग दो माह तक अधिवक्ताओं ने कलमबंद हड़ताल, क्रमिक अनशन, धरना-प्रदर्शन एवं कोटपूतली बंद जैसे कार्यक्रम आयोजित किए। इसी संघर्ष के परिणामस्वरूप राज्य सरकार और Rajasthan High Court द्वारा कोटपूतली मुख्यालय पर डीजे कोर्ट सहित समकक्ष न्यायालयों की स्थापना की गई।
अब एडवोकेट तंवर ने पूरक बजट में कोटपूतली जिला मुख्यालय पर राजकीय विधि महाविद्यालय की घोषणा करने की मांग की है। उन्होंने पत्र में उल्लेख किया कि जिले में एक भी राजकीय विधि महाविद्यालय नहीं है, जिससे कानून की पढ़ाई के इच्छुक विद्यार्थियों को या तो निजी महाविद्यालयों में महंगी फीस देकर अध्ययन करना पड़ता है अथवा जयपुर और अलवर जैसे शहरों का रुख करना पड़ता है।
तंवर ने यह भी बताया कि पूर्व में राजकीय एलबीएस पीजी महाविद्यालय, कोटपूतली में विधि संकाय संचालित हो चुका है, जिसे बाद में बंद कर दिया गया था। वर्तमान में वहां पर्याप्त संसाधन एवं कक्ष उपलब्ध हैं, जिससे पुनः विधि महाविद्यालय प्रारंभ किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि यदि कोटपूतली में राजकीय विधि महाविद्यालय स्थापित होता है तो गरीब, कमजोर, पिछड़े एवं वंचित वर्ग के विद्यार्थियों को सीधा लाभ मिलेगा तथा क्षेत्र में कानून और संविधान के प्रति जागरूकता भी बढ़ेगी।
एडवोकेट तंवर ने चेतावनी दी है कि यदि राज्य सरकार शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लेती है तो अधिवक्ता समुदाय विधि विद्यार्थियों के हित में आंदोलन और धरना-प्रदर्शन करने को बाध्य होगा।



