पावटा (राजेश कुमार हाडिया)। कस्बे में नवनिर्मित सिविल न्यायालय भवन परिसर से सटे खसरा नंबर 2220/2737 की भूमि को लेकर राजस्व रिकॉर्ड में कथित अनियमितताओं का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। इस संबंध में पावटा बार एसोसिएशन के अध्यक्ष एडवोकेट रामनिवास यादव ने जिला कलेक्टर कोटपूतली-बहरोड़ को ज्ञापन सौंपकर पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग की है।

ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि संबंधित खसरा नंबर की भूमि पर बिना किसी सक्षम सिविल न्यायालय के आदेश के राजस्व रिकॉर्ड में स्थगन (स्टे) नोट दर्ज कर दिया गया है। जबकि तहसील कार्यालय पावटा सहित संबंधित राजस्व अभिलेखों में ऐसे किसी न्यायालयीन आदेश का कोई प्रमाण उपलब्ध नहीं है।

एडवोकेट रामनिवास यादव ने आरोप लगाया कि राजस्व अधिकारियों एवं कर्मचारियों द्वारा पद का दुरुपयोग करते हुए जानबूझकर रिकॉर्ड में हेराफेरी की गई है, जिससे खातेदारों के साथ अन्याय हो रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि उपखंड अधिकारी न्यायालय द्वारा जारी स्थगन आदेशों की भी अनदेखी कर कुछ मामलों में भूमि के विक्रय पत्र पंजीकृत किए जा रहे हैं, जो गंभीर जांच का विषय है।
उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, “यदि सिविल न्यायालय द्वारा कोई स्थगन आदेश जारी किया गया होता, तो उसका रिकॉर्ड तहसील कार्यालय में उपलब्ध होना चाहिए था, लेकिन ऐसा कोई दस्तावेज मौजूद नहीं है। यह पूरे मामले को संदिग्ध बनाता है।”
बार एसोसिएशन ने मांग की है कि संबंधित खसरा नंबर के राजस्व रिकॉर्ड की गहन जांच कर बिना आधार दर्ज स्थगन नोट को तत्काल हटाया जाए तथा दोषी अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
ज्ञापन में चेतावनी दी गई है कि यदि तीन दिनों के भीतर उचित कार्रवाई नहीं की गई, तो पावटा बार एसोसिएशन आंदोलन का रास्ता अपनाएगा और मुख्यमंत्री, राजस्व मंत्री तथा राजस्व मंडल अजमेर सहित उच्च स्तर पर शिकायत दर्ज कराई जाएगी।



