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Maha Shivratri : भोलेनाथ के ‘ जलाभिषेक’ के लिए लगी भक्तों की भीड़। जानिए, महाशिवरात्रि से जुड़ी खास बातें

News Chakra February 18, 2023
Maha Shivratri क्यों मनाई जाती है?

न्यूज़ चक्र। आज Maha Shivratri (महाशिवरात्रि ) है, मंदिरों में भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी है और भगवान भोले को विभिन्न तरह के भोग लगाकर रिझाने के जतन किये जा रहे है। कोई जल चढ़ाकर मन्त्रों के जाप कर रहा है तो कोई बिल्वपत्र, आक, बेर, गाजर व हलवा लेकर आया है। बच्चे, महिलाएं व पुरुष सभी भोलेनाथ का ‘ जलाभिषेक ‘ करने के लिए लालायित है। कोटपूतली के बड़ा मंदिर, तालाब वाले शिव मंदिर और बड़ाबास भोलेनाथ मंदिर व लक्ष्मीनगर श्रीराम बगीची में भक्तों की सुबह से कतारें लगी हैं। आइये जानते है महाशिवरात्रि से जुड़ी खास बातें।

महाशिवरात्रि से जुड़ी खास बातें

  • महाशिवरात्रि अर्थ क्या है?
  • Maha Shivratri क्यों मनाई जाती है?
  • महाशिवरात्रि पर हमें क्या करना चाहिए?
  • महाशिवरात्रि कहां मनाई जाती है?
  • महाशिवरात्रि के दिन क्या करना चाहिए क्या नहीं करना चाहिए?
  • शिवरात्रि पर उपवास क्यों रखते हैं?
  • महाशिवरात्रि में किसका विवाह हुआ था?
  • शिव जी का प्रिय मंत्र कौन सा है?

महाशिवरात्रि अर्थ क्या है?

Maha Shivratri शब्द संस्कृत भाषा से लिया गया है, जिसमें ‘महा’ का अर्थ ‘बड़ा’ होता है और ‘शिवरात्रि’ शब्द का अर्थ होता है ‘शिव की रात’. इसलिए, महाशिवरात्रि का अर्थ होता है ‘शिव की बड़ी रात’।

यह त्योहार हिंदू धर्म में महत्वपूर्ण है जो हर साल फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन भगवान शिव की पूजा की जाती है और इस दिन के व्रत एवं पूजा से शिव भक्त अपने प्रार्थनाएं सिद्ध करते हैं और उन्हें शिव का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

Maha Shivratri : भोलेनाथ के ‘ जलाभिषेक' के लिए लगी भक्तों की भीड़

Maha Shivratri क्यों मनाई जाती है?

महाशिवरात्रि का महत्व वेदों में भी वर्णित है। वेदों के अनुसार, भगवान शिव दुनिया के सभी दुखों से मुक्ति देने वाले देवता हैं। महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव की पूजा करने से सभी दोषों से छुटकारा मिलता है और जीवन में समृद्धि एवं सफलता की प्राप्ति होती है।

इसके अलावा महाशिवरात्रि का महत्व अन्य धार्मिक और ऐतिहासिक कारणों से भी है। इस दिन को शिव पुत्र शिव-पार्वती का विवाह दिन माना जाता है और भगवान शिव के तीनों लोकों की पूजा की जाती है।

महाशिवरात्रि पर हमें क्या करना चाहिए?

महाशिवरात्रि पर हमें कुछ विशेष चीजें करनी चाहिए जो हमारी धार्मिक और आध्यात्मिक उन्नति में मदद करती हैं। यहां कुछ ऐसे कार्य बताए गए हैं जो आप महाशिवरात्रि के दिन कर सकते हैं:

  1. जागरण: Maha Shivratri के दिन रात भर जागरण करना शिव भक्तों की रुचि को बढ़ाता है। जागरण के दौरान शिव जी के भजन गाए जाते हैं, मंत्र जप किया जाता है और उनकी पूजा की जाती है।
  2. शिवलिंग की पूजा: महाशिवरात्रि के दिन शिवलिंग की पूजा विशेष रूप से की जाती है। इस दिन शिवलिंग पर जल, दूध, दही, घी आदि की अभिषेक किया जाता है। इसके अलावा शिवलिंग पर बेलपत्र, धातूरा, अक्षता, फूल आदि चढ़ाए जाते हैं।
  3. तपस्या: महाशिवरात्रि के दिन तपस्या करना बहुत शुभ माना जाता है। इस दिन नियमित रूप से जप, ध्यान आदि करके ध्यान केंद्रित किया जाता है।
  4. जलाभिषेक: महाशिवरात्रि पर भगवान शिव की मूर्ति पर जलाभिषेक करना बहुत महत्वपूर्ण होता है। जल के साथ दूध, घी या मधु भी भगवान शिव की मूर्ति पर चढ़ाया जा सकता है।
  5. ध्यान: शिव जी की उपासना के लिए ध्यान करना बहुत महत्वपूर्ण होता है। इस दिन कुछ लोग एकांतवास करते हुए ध्यान करते हैं।
  6. रुद्राभिषेक: महाशिवरात्रि (Maha Shivratri ) पर शिव जी की मूर्ति पर रुद्राभिषेक करना बहुत फलदायी माना जाता है।
  7. मंत्र जप: शिव मंत्र जप करना बहुत महत्वपूर्ण होता है। ‘ॐ नमः शिवाय’, ‘महामृत्युंजय मंत्र’ आदि मंत्रों का जप करना बहुत शुभ होता है।
  8. उपवास व्रत: महाशिवरात्रि का उपवास व्रत करना बहुत महत्वपूर्ण होता है। इस दिन केवल फल और शाकाहारी भोजन लेना चाहिए
Maha Shivratri : भोलेनाथ के ‘ जलाभिषेक' के लिए लगी भक्तों की भीड़

महाशिवरात्रि कहां मनाई जाती है?

Maha Shivratri भारत और नेपाल जैसे हिंदू धर्म के देशों में मनाई जाती है। यह त्योहार हिंदू कैलेंडर के माघ महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है। इस तिथि को “महाशिवरात्रि” या “शिवरात्रि” के नाम से जाना जाता है।

भारत के जम्मू और कश्मीर में अमरनाथ यात्रा जैसे शिव के प्रति भक्ति के उत्सव आयोजित किए जाते हैं। इसके अलावा Maha Shivratri विभिन्न हिस्सों में मनाई जाती है। इस दिन शिव मंदिरों में विशेष पूजाएं होती हैं और लोग शिवलिंग को जल चढ़ाते हैं।

इसके अलावा, उत्तर प्रदेश में बनारस, वाराणसी, मथुरा, वृन्दावन और महोबा, मध्य प्रदेश में उज्जैन और राजस्थान में नाथद्वारा, जोधपुर, जयपुर और बीकानेर, बिहार में देवघर और बोधगया, महाराष्ट्र में भीमशंकर, नासिक, पुणे जैसे स्थानों पर (Maha Shivratri) महाशिवरात्रि धूमधाम से मनाई जाती है। इस दिन दक्षिण भारत के अन्य राज्यों में भी शिव मंदिरों में शिवलिंग की पूजा और उसके अर्चना दौरान धातु, फल और फूलों की बेल पत्र चढ़ाने जैसी रस्में मनाई जाती है।

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महाशिवरात्रि के दिन क्या करना चाहिए क्या नहीं करना चाहिए?

महाशिवरात्रि के दिन शिव भक्तों को भगवान शिव का विशेष पूजन करना चाहिए। Maha Shivratri दिन लोग मंदिरों में जाकर शिवलिंग को जल, दूध, बेल पत्र, धातुरा और अन्य चढ़ावे के साथ पूजते हैं। इसके अलावा इस दिन कुछ विशेष बातों का ध्यान रखना चाहिए:

  • इस दिन को उचित समय पर जागरण करके गुरु मंत्र का जप करना चाहिए।
  • इस दिन फलाहार व व्रत रखना चाहिए।
  • मांस, शराब, तम्बाकू जैसी चीजें नहीं खानी चाहिए।
  • इस दिन किसी भी प्रकार का क्रोध नहीं करना चाहिए।
  • शिव मंदिरों में जाने से पहले नहाना चाहिए।

इस दिन शिव की विशेष पूजा करने से भगवान शिव की कृपा मिलती है और भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

शिवरात्रि पर उपवास क्यों रखते हैं?

शिवरात्रि पर उपवास रखने के पीछे कई कारण हैं। प्राचीन धार्मिक ग्रंथों और पौराणिक कथाओं में बताया गया है कि महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव के उपासकों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। इस दिन भगवान शिव विशेष रूप से अपने भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। उपवास रखने से शरीर को शुद्ध और सात्विक बनाया जाता है जिससे मन को शांति मिलती है। इसके अलावा, उपवास रखने से मनुष्य को अपनी इन्द्रियों पर नियंत्रण रखने की क्षमता मिलती है। उपवास रखने से शरीर को शुद्ध और सात्विक बनाया जाता है जिससे मन को शांति मिलती है। अधिकतर लोग शिवरात्रि के दिन एकांतवास का भी पालन करते हैं जो उन्हें आत्मविकास और ध्यान करने की समझ देता है।

महाशिवरात्रि में किसका विवाह हुआ था?

महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव की अनेक कथाएं हैं, लेकिन उनमें से एक कथा के अनुसार, भगवान शिव और पार्वती का विवाह महाशिवरात्रि के दिन हुआ था। इस कथा के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में चुना था और उन्हें प्राप्त करने के लिए वह बड़ी भक्ति के साथ शिवलिंग पूजन करती थीं। उसके बाद उन्होंने शिवजी को प्रणय करने के लिए उनका मनोरंजन किया और अपने आकर्षक रूपों का परिचय दिया। इस प्रणय से भगवान शिव को पार्वती पत्नी के रूप में स्वीकार करना पड़ा।

यह विवाह पूर्णिमा तिथि के दिन हुआ था, जो महाशिवरात्रि के पहले दिन को कहा जाता है। इसलिए, महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह का उत्सव भी मनाया जाता है।

शिव जी का प्रिय मंत्र कौन सा है?

शिव जी का प्रिय मंत्र “ॐ नमः शिवाय” है। यह मंत्र शिव जी की उपासना के लिए बहुत उपयुक्त है और इसे जप करने से शिव जी की कृपा प्राप्त होती है।

महाशिवरात्रि की लाइव कवरेज न्यूज़ चक्र पर देखे।

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