पावटा (राजेश कुमार हाडिया)। नगरपालिका पावटा-प्रागपुरा क्षेत्र एवं आसपास के गांवों में माघ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी पर सकट चौथ (तिलकुट चौथ) का पर्व श्रद्धा, आस्था और परंपरागत विश्वास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर महिलाओं ने निर्जला व्रत रखकर चौथ माता एवं भगवान गणेश की विधिवत पूजा-अर्चना की तथा परिवार की सुख-समृद्धि और संतान की दीर्घायु की कामना की।

सकट चौथ को लेकर दिनभर मंदिरों एवं घरों में पूजा-पाठ का सिलसिला चलता रहा। व्रतधारी महिलाओं ने चौथ माता की कथा सुनी और पारंपरिक विधि-विधान से पूजा संपन्न की। महिलाओं का कहना है कि हिंदू धर्म में सकट चौथ का विशेष महत्व है, जिसे संकष्टी चतुर्थी भी कहा जाता है। इस दिन महिलाएं निर्जला व्रत रखकर रात्रि में चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत का पारण करती हैं।

हालांकि इस बार घने कोहरे और बादलों के कारण देर रात तक चंद्रमा के दर्शन नहीं हो सके। ऐसे में अनेक महिलाएं मंगल गीत गाते हुए घंटों तक चंद्र दर्शन की प्रतीक्षा करती रहीं। चंद्रमा के स्पष्ट दर्शन न होने पर कई महिलाओं ने अपने रिश्तेदारों से फोन अथवा वीडियो कॉल के माध्यम से मोबाइल पर चंद्र दर्शन कर अर्घ्य अर्पित किया और व्रत का पारण किया।
पूरे क्षेत्र में सकट चौथ का यह पर्व परंपरा, आस्था और आधुनिक तकनीक के अनूठे समन्वय के रूप में देखने को मिला।



