पावटा कस्बे से लगभग 3 किलोमीटर दूर ग्राम खेलना स्थित संत शिरोमणि टीलाजी महाराज की तपोस्थली पर प्रतिवर्ष धूलंडी के अवसर पर विशाल मेले का आयोजन किया जाता है। ऊंचे टिले पर विराजमान यह पावन धाम आसपास ही नहीं, बल्कि दूरदराज क्षेत्रों के श्रद्धालुओं की गहरी आस्था का केंद्र है।

खेलना गांव अपनी विशिष्ट धार्मिक परंपराओं के लिए विशेष पहचान रखता है। यहां वृक्ष को ही टीलाजी महाराज का स्वरूप मानकर पूजा की जाती है। मेले की सबसे अनूठी विशेषता यह है कि यहां कोई भी एक-दूसरे को रंग या गुलाल नहीं लगाता। होली का पर्व यहां भजन, सत्संग और विशेष पूजा-अर्चना के माध्यम से आध्यात्मिक वातावरण में मनाया जाता है।

श्रद्धालु मंदिर परिसर में स्थित झाल के पेड़ पर मनोकामना पूर्ण होने की आशा से पवित्र डोरी बांधते हैं। मान्यता है कि इच्छा पूर्ण होने पर भक्त पुनः आकर वह डोरी खोलकर मंदिर में अर्पित करते हैं। मंदिर के पुजारी गजानंद टीलावत के अनुसार इस धाम का इतिहास मुगल काल से जुड़ा हुआ है। जनश्रुति है कि अजमेर जाते समय सम्राट अकबर यहां रुके थे। सेना के भोजन की व्यवस्था को लेकर स्थानीय शासक द्वारा टीलाजी महाराज से प्रार्थना की गई और चमत्कारिक रूप से पूरी सेना के लिए भोजन उपलब्ध हो गया। इस घटना से प्रभावित होकर अकबर स्वयं संत के दर्शन हेतु पहुंचे थे।

मंदिर परिसर के समीप स्थित “गुण की गुफा” भी श्रद्धा का प्रमुख केंद्र है, जहां संत टीलाजी महाराज द्वारा कठोर तपस्या किए जाने की मान्यता है। आज भी यह स्थान साधना और भक्ति का प्रतीक माना जाता है।

खेलना गांव न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की मिसाल भी पेश करता है। गांव में पेड़ काटने पर पूर्ण प्रतिबंध है। ग्रामीणों की मान्यता है कि वृक्षों में देवताओं का वास होता है और उन्हें हानि पहुंचाना अपशकुन माना जाता है। इस प्रकार यह धाम आस्था, इतिहास और प्रकृति संरक्षण का अद्भुत संगम प्रस्तुत करता है।

श्री टीला द्वाराचार्य सेवा समिति के अध्यक्ष विष्णु कुमार टीलावत ने जानकारी दी कि इस वर्ष 3 मार्च को होली पर ग्रहण काल होने के कारण मंदिर के कपाट बंद रहेंगे। अतः मेला 4 मार्च, बुधवार को आयोजित किया जाएगा।

मेले की तैयारियां अंतिम चरण में हैं और व्यवस्थाओं को सुचारु बनाने के लिए कार्यकर्ता जुटे हुए हैं। आयोजन में रणजीत सिंह शेखावत, पूर्व सरपंच मुरारी लाल, रमेश चंद, काशीराम, जगदीश प्रसाद सेन, राजेश कुमार, सत्य प्रकाश, महेंद्र कुमार, सत्यनारायण टीलावत, भैरूराम यादव, विजय कुमार सहित अन्य कार्यकर्ता एवं श्रद्धालु सक्रिय रूप से सहयोग कर रहे हैं।

हर वर्ष की भांति इस बार भी हजारों श्रद्धालु यहां पहुंचकर आध्यात्मिक वातावरण में सराबोर होंगे और संत टीलाजी महाराज के चरणों में अपनी श्रद्धा अर्पित करेंगे। खेलना का यह मेला भारतीय संस्कृति की उस परंपरा को जीवंत रखे हुए है, जहां होली रंगों से नहीं, बल्कि भक्ति और साधना से मनाई जाती है।



