ज्येष्ठ पूर्णिमा के अवसर पर वन विभाग द्वारा जिले में वन्य जीव गणना का कार्य शुक्रवार शाम 5 बजे से विधिवत शुरू किया गया, जो लगातार 24 घंटे तक शनिवार शाम 5 बजे तक जारी रहेगा। इस बार गणना की समय-सारिणी में बदलाव करते हुए इसे पहली बार शाम 5 बजे से प्रारंभ किया गया है, जबकि पूर्व में यह प्रक्रिया सुबह 8 बजे से शुरू होती थी।

रेंजर सतपाल ढिलान के अनुसार, इस वर्ष वन विभाग ने अधिक सटीक आंकड़े जुटाने के लिए ‘वॉटर हॉल पद्धति’ अपनाई है। इसके तहत जिले के 11 प्रमुख जल स्रोतों के आसपास विशेष निगरानी प्वाइंट बनाए गए हैं, जहां वन विभाग की टीमें तैनात की गई हैं। कर्मचारी जल स्रोतों से सुरक्षित दूरी पर मचान बनाकर वन्य जीवों की गतिविधियों पर लगातार नजर रख रहे हैं।

इसके अलावा 5 स्थानों पर आधुनिक ट्रैप कैमरे भी लगाए गए हैं, जो स्वतः ही वन्य जीवों की तस्वीरें कैद कर रहे हैं। इन कैमरों की मदद से उन जानवरों की उपस्थिति भी दर्ज की जा रही है, जो आमतौर पर दिन में दिखाई नहीं देते।

वन अधिकारियों का कहना है कि मचान से निगरानी करने का मुख्य उद्देश्य वन्य जीवों को बिना किसी व्यवधान के जल स्रोतों तक पहुंचने देना है, जिससे उनकी सटीक गणना संभव हो सके। इस महत्वपूर्ण कार्य में वन विभाग के 15 कार्मिकों के साथ वन मित्र भी सहयोग कर रहे हैं।
वन्य जीव संरक्षण की दिशा में यह पहल न केवल आंकड़ों की सटीकता बढ़ाएगी, बल्कि जैव विविधता के संरक्षण में भी अहम भूमिका निभाएगी।



