पावटा कस्बे में सामाजिक जागरूकता और बेटियों के सम्मान का एक प्रेरणादायक दृश्य उस समय देखने को मिला, जब कमलेश कुमार पहाड़ीवाल ने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर अपनी बेटियों पूजा और आरती की शादी में उनकी घोड़ी पर बिंदौरी निकालकर समाज को बेटा-बेटी समानता का मजबूत संदेश दिया। आमतौर पर परंपरा के अनुसार शादियों में घोड़ी पर बिंदौरी बेटे की निकाली जाती है, लेकिन इस परंपरा को सकारात्मक सोच के साथ बदलते हुए पहाड़ीवाल परिवार ने बेटियों के सम्मान में यह अनूठी पहल की।

बेटियों की घोड़ी पर निकली बिंदौरी को देखने के लिए बड़ी संख्या में परिजन, रिश्तेदार और क्षेत्र के लोग मौजूद रहे। बैंड-बाजों और खुशियों के माहौल के बीच जब बेटियों की बिंदौरी घोड़ी पर निकली तो लोगों ने इस पहल की सराहना करते हुए इसे समाज के लिए प्रेरणादायक कदम बताया।
इस अवसर पर सोनी देवी ने बताया कि बेटियों की घोड़ी से बिंदौरी निकालने का मुख्य उद्देश्य समाज में लंबे समय से चली आ रही बेटा-बेटी के भेदभाव की सोच को समाप्त करना और समानता का संदेश देना है। उन्होंने कहा कि आज बेटियां शिक्षा, खेल, प्रशासन, व्यवसाय और अन्य कई क्षेत्रों में आगे बढ़कर देश और समाज का नाम रोशन कर रही हैं, इसलिए समाज को भी अपनी सोच बदलनी चाहिए।
पहाड़ीवाल परिवार की इस पहल को उपस्थित लोगों ने सराहते हुए कहा कि ऐसे प्रयास समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का काम करते हैं। बेटियों के सम्मान और समान अधिकारों का संदेश देने वाली यह पहल निश्चित रूप से अन्य परिवारों के लिए भी प्रेरणा बनेगी।



