
नारेहड़ा। क्षेत्र में सड़क निर्माण व मरम्मत के नाम पर बरती जा रही घोर लापरवाही अब आमजन की जान पर भारी पड़ने लगी है। रोड विभाग द्वारा मनमर्जी से आबादी क्षेत्रों में जगह-जगह सड़कें खोद दी गई हैं, लेकिन न तो काम पूरा किया गया और न ही सुरक्षा के कोई इंतजाम किए गए। खुले गड्ढों, बिना चेतावनी संकेतकों और सुरक्षा पट्टियों के कारण राहगीरों व वाहन चालकों को रोजाना जोखिम भरी आवाजाही करनी पड़ रही है।
दांतिल रोड सहित नारेहड़ा की प्रमुख सड़कों पर खोदे गए गड्ढे लंबे समय से ऐसे ही पड़े हैं। न तो वहां कोई निर्माण कार्य चल रहा है और न ही गड्ढों को भरने की कोशिश की जा रही है। हालात इतने खराब हैं कि लोग चलते-चलते गड्ढों में गिर रहे हैं और वाहन चालकों को बार-बार अनियंत्रित होना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह लापरवाही किसी बड़े हादसे को दावत दे रही है।
अलसुबह टला बड़ा हादसा, खुले सरिए बने खतरा
लापरवाही की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि अलसुबह एक दोपहिया वाहन चालक सड़क किनारे खोदे गए गड्ढे में अनियंत्रित होकर गिर गया। गनीमत रही कि गड्ढे में खड़े सरिए उसके शरीर में नहीं लगे, अन्यथा एक बड़ा और जानलेवा हादसा हो सकता था। ग्रामीणों के अनुसार क्षेत्र में ऐसे कई खुले गड्ढे मौजूद हैं, जो लगातार दुर्घटनाओं को न्यौता दे रहे हैं। जिम्मेदार विभाग आबादी क्षेत्रों में सड़कें खोदकर मानो भूल ही गया है।
ग्रामीणों में इस बात को लेकर भी भारी नाराजगी है कि नारेहड़ा में ऐसा प्रतीत होता है मानो कोई जनप्रतिनिधि ही नहीं है। लोगों का आरोप है कि चुनाव के समय बड़े-बड़े वादे करने वाले नेता बाद में क्षेत्र की समस्याओं से मुंह मोड़ लेते हैं। पास के गांव सरुंड का उदाहरण देते हुए ग्रामीण बताते हैं कि वहां सड़क खोदते ही तुरंत कंक्रीट डालकर काम पूरा कर दिया गया, जबकि नारेहड़ा में महीनों पहले खोदी गई सड़क आज तक जस की तस पड़ी है।
स्थानीय निवासियों ने मांग की है कि जल्द से जल्द गड्ढों को भरकर सड़कें दुरुस्त की जाएं, साथ ही सुरक्षा के लिए संकेतक और बैरिकेडिंग लगाई जाए।







