खैरथल : विद्यालय के बाहर कथा का आयोजन, ग्रामीणों की भक्ति विद्यार्थियों की ले रही परीक्षा 

न्यूज़ चक्र, खैरथल-तिजारा: जिला खैरथल तिजारा के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, गादुवास के मुख्य द्वार के बाहर इन दिनों भागवत कथा का आयोजन किया जा रहा है। आध्यात्मिक आयोजनों का समाज में विशेष महत्व होता है, लेकिन जब यह बच्चों के भविष्य में बाधा बनने लगे, तो इसे संतुलित करना आवश्यक हो जाता है। 

खैरथल : विद्यालय के बाहर कथा का आयोजन, ग्रामीणों की भक्ति विद्यार्थियों की ले रही परीक्षा 
विद्यालय के मुख्य द्वार के सामने चल रही भागवत कथा

विद्यालय के ठीक बाहर लगे ऊँचे ध्वनि विस्तारक यंत्र (स्पीकर) विद्यार्थियों के लिए परेशानी का कारण बन गए हैं। परीक्षा की घड़ी में जब बच्चों को गहन अध्ययन और शांति की सबसे अधिक आवश्यकता होती है, तब लगातार गूँजते लाउडस्पीकर उनकी एकाग्रता भंग कर रहे हैं। विद्यालय प्रशासन और शिक्षक भी इस स्थिति से परेशान हैं, लेकिन ग्रामीणों की मनमानी के आगे वे असहाय महसूस कर रहे हैं।

खैरथल : विद्यालय के बाहर कथा का आयोजन, ग्रामीणों की भक्ति विद्यार्थियों की ले रही परीक्षा 
कैमरे की एक ही तस्वीर में विद्यालय भवन व कथा स्थल देख सकते हैं

विद्यार्थियों के भविष्य पर असर

विद्यालय के कई विद्यार्थी बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी में जुटे हैं। एक छात्र ने भावुक होकर बताया, ‘हमारी परीक्षा नजदीक है, लेकिन इस शोर-शराबे के बीच पढ़ाई करना बेहद मुश्किल हो रहा है।’ दूसरी ओर, कई अभिभावक भी इस स्थिति को लेकर चिंतित हैं। वे मानते हैं कि धार्मिक आयोजन महत्वपूर्ण हैं, लेकिन इसका समय और स्थान ऐसा होना चाहिए, जिससे किसी को असुविधा न हो। 

खैरथल : विद्यालय के बाहर कथा का आयोजन, ग्रामीणों की भक्ति विद्यार्थियों की ले रही परीक्षा 
कथा स्थल के सामने से गुजरती छात्राएं

शिक्षकों की नाराजगी, लेकिन विरोध करने में असमर्थ

विद्यालय स्टाफ भी इस स्थिति से परेशान है। एक शिक्षक ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, हम चाहते हैं कि बच्चे अच्छे अंक लेकर आएँ, लेकिन जब बाहरी शोर उन्हें पढ़ाई ही नहीं करने देगा, तो हम कैसे उम्मीद करें कि वे अच्छा प्रदर्शन करेंगे? लेकिन ग्रामीणों की भावनाओं को ठेस न पहुँचाने के डर से विद्यालय प्रशासन कोई खुला विरोध नहीं कर पा रहा है। 

समाज को चाहिए संतुलन

गाँव में धार्मिक आयोजनों की परंपरा पुरानी है, लेकिन बदलते समय में यह जरूरी हो गया है कि ऐसे कार्यक्रमों को सही समय और स्थान पर आयोजित किया जाए। परीक्षा के इस महत्वपूर्ण समय में बच्चों के भविष्य को प्राथमिकता देना आवश्यक है। 

प्रशासन को चाहिए कि वह इस विषय पर ध्यान दे और यह सुनिश्चित करे कि धार्मिक आयोजनों से किसी को परेशानी न हो। गाँव के जागरूक नागरिकों को भी इस मुद्दे को समझना चाहिए और बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए शांति और सहयोग का वातावरण बनाना चाहिए।

Author

  • Vikas Verma

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