कोटपूतली-बहरोड़ जिले में पशु-पक्षियों के लिए फरिश्ता बने तारा पूतली, सूखे कुंडों में भरवाएंगे पानी

कोटपूतली (राजेश कुमार हाडिया)। क्षेत्र में पड़ रही भीषण गर्मी और लगातार बढ़ते तापमान के बीच बेजुबान पशु-पक्षियों के लिए राहत पहुंचाने की एक सराहनीय पहल सामने आई है। कांग्रेस एससी विभाग के जिलाध्यक्ष, पूर्व पार्षद एवं समाजसेवी तारा पूतली ने क्षेत्र में सूख चुके पशु-पक्षियों के जल कुंडों और खेलियों में अपने निजी खर्च से पानी भरवाने का निर्णय लिया है, ताकि भीषण गर्मी के दौर में बेजुबान जीवों को प्यास से राहत मिल सके।

कोटपूतली-बहरोड़ जिले में पशु-पक्षियों के लिए फरिश्ता बने तारा पूतली, सूखे कुंडों में भरवाएंगे पानी
पशु-पक्षियों के लिए फरिश्ता बने तारा पूतली, सूखे कुंडों में भरवाएंगे पानी

इन दिनों क्षेत्र में अनेक स्थानों पर पशु-पक्षियों के लिए बनाए गए जल कुंड पानी के अभाव में सूखे पड़े हैं। ऐसे में तारा पूतली ने आमजन से सहयोग की अपील करते हुए कहा है कि जहां भी खाली या सूखे कुंड, खेलियां अथवा पशु-पक्षियों के लिए बने जल स्रोत दिखाई दें, उनकी सूचना उपलब्ध कराई जाए। सूचना मिलते ही संबंधित स्थान पर टैंकरों के माध्यम से पानी की व्यवस्था करवाई जाएगी।

उन्होंने बताया कि जिन क्षेत्रों में पशु-पक्षियों के लिए पानी की कोई व्यवस्था नहीं है, वहां भी आवश्यकता के अनुसार नई खेलियां या जल कुंड बनवाने का प्रयास किया जाएगा, ताकि गर्मी के मौसम में किसी भी बेजुबान जीव को पानी के अभाव का सामना न करना पड़े।

तारा पूतली ने कहा कि गर्मी का सबसे अधिक प्रभाव उन पशु-पक्षियों पर पड़ता है जो अपनी जरूरत किसी से व्यक्त नहीं कर सकते। ऐसे समय में समाज के प्रत्येक व्यक्ति का दायित्व बनता है कि वह जीवों के प्रति संवेदनशीलता दिखाए और उनके लिए पानी एवं छाया जैसी मूलभूत सुविधाओं की व्यवस्था में योगदान दे।

उन्होंने आमजन से अपने घरों, दुकानों और सार्वजनिक स्थानों पर परिंडे लगाने तथा नियमित रूप से उनमें पानी भरने की भी अपील की। उनका कहना है कि छोटी-सी पहल भी अनेक बेजुबान जीवों के जीवन की रक्षा कर सकती है।

स्थानीय नागरिकों ने इस मानवीय पहल की सराहना करते हुए कहा कि भीषण गर्मी के इस दौर में पशु-पक्षियों के लिए जल व्यवस्था करना न केवल जीव दया का कार्य है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक उत्तरदायित्व का भी उत्कृष्ट उदाहरण है। तारा पूतली की यह पहल समाज में सेवा, संवेदना और जीव प्रेम का सकारात्मक संदेश दे रही है।

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