पावटा-प्रागपुरा में चेयरमैन कुर्सी के लिए ‘किंगमेकर’ की तलाश

पावटा-प्रागपुरा नगरपालिका चुनाव में बुधवार को मतदान संपन्न होते ही अब चेयरमैन की कुर्सी को लेकर सियासी गणित तेज हो गया है। 45 वार्डों में मैदान में उतरे प्रत्याशियों का भाग्य ईवीएम में कैद हो चुका है और अब भाजपा, कांग्रेस सहित निर्दलीय खेमों में संभावित बोर्ड गठन को लेकर जोड़-तोड़ के समीकरणों पर चर्चा शुरू हो गई है। हालांकि वास्तविक तस्वीर सोमवार 14 सितंबर को होने वाली मतगणना के बाद ही साफ होगी।

पावटा-प्रागपुरा में चेयरमैन कुर्सी के लिए ‘किंगमेकर’ की तलाश
पावटा-प्रागपुरा में चेयरमैन कुर्सी के लिए ‘किंगमेकर’ की तलाश

निर्वाचन विभाग के अंतिम आंकड़ों के अनुसार पावटा-प्रागपुरा नगरपालिका क्षेत्र में 46,814 मतदाताओं में से 38,739 मतदाताओं ने मतदान किया, जिससे कुल मतदान प्रतिशत 82.75 फीसदी रहा। मतदान शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ। कुछ मतदान केंद्रों पर ईवीएम में तकनीकी समस्या सामने आने के बाद तत्काल जांच कर मतदान फिर शुरू कराया गया और प्रक्रिया लगातार जारी रही।

पावटा-प्रागपुरा में चेयरमैन कुर्सी के लिए ‘किंगमेकर’ की तलाश
पावटा-प्रागपुरा में चेयरमैन कुर्सी के लिए ‘किंगमेकर’ की तलाश

मतदान समाप्त होने के बाद अब चुनावी चर्चा का केंद्र पार्षद पद से आगे बढ़कर नगरपालिका चेयरमैन के पद पर पहुंच गया है। किस दल के कितने प्रत्याशी जीतकर आते हैं और निर्दलीयों की संख्या कितनी रहती है, इसी पर बोर्ड गठन का पूरा गणित निर्भर करेगा।

पावटा-प्रागपुरा में चेयरमैन कुर्सी के लिए ‘किंगमेकर’ की तलाश
पावटा-प्रागपुरा में चेयरमैन कुर्सी के लिए ‘किंगमेकर’ की तलाश

चुनाव मैदान में कई वार्डों में बहुकोणीय मुकाबले देखने को मिले हैं। ऐसे में यदि किसी एक राजनीतिक दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलता है तो निर्दलीय पार्षदों की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। यही कारण है कि चुनावी परिणाम से पहले ही संभावित विजेताओं और निर्दलीय प्रत्याशियों को लेकर राजनीतिक खेमों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है।

पावटा-प्रागपुरा के चुनावी समीकरणों में निर्दलीय प्रत्याशियों को इस बार संभावित किंगमेकर के रूप में देखा जा रहा है। यदि भाजपा या कांग्रेस बहुमत के आंकड़े से पीछे रहती है तो बोर्ड गठन के लिए निर्दलीय पार्षदों का समर्थन निर्णायक हो सकता है। राजनीतिक जानकारों के बीच यह चर्चा भी है कि कुछ वार्डों के परिणाम आने वाले बोर्ड के पक्ष और विपक्ष का संतुलन बदल सकते हैं। हालांकि अभी किसी भी प्रत्याशी को विजेता मानना जल्दबाजी होगी। ईवीएम खुलने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि किसके खाते में कितनी सीटें जाती हैं।

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