कस्बे से करीब पांच किलोमीटर दूर भौनावास की बागौरी की ढाणी में अरावली पर्वतमाला के बीच स्थित बागौरी माता मंदिर श्रद्धालुओं की गहरी आस्था का केंद्र है। लगभग 2200 फीट ऊंची पहाड़ी पर बना यह ऐतिहासिक मंदिर करीब 500 साल पुराना बताया जाता है। शारदीय नवरात्र के दौरान यहां राजस्थान के अलावा उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, हरियाणा और मध्यप्रदेश सहित देश के विभिन्न हिस्सों से श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं।

अनेकों भक्त नौ दिन तक मंदिर में रुककर माता की आराधना करते हैं। मंदिर तक पहुंचने का मार्ग भी अपने आप में खास है। पहाड़ी के आधे रास्ते तक पत्थरों का खड़ंजा बना हुआ है, जहां वाहन पहुंच सकते हैं। इसके बाद करीब 400 सीढ़ियां चढ़कर माता के दरबार तक पहुंचा जाता है। रास्ते में 42 घुमाव पड़ते हैं, जो इस पहाड़ी यात्रा को अलग पहचान देते हैं। मंदिर परिसर में प्राकृतिक रूप से बना एक फीट से भी छोटा कुंड है। इसमें चांदी की गर्दन में माता का शीश स्थापित है, जिसे श्रद्धालु मां दुर्गा का स्वरूप मानकर पूजते हैं।

मंदिर के पुजारी राजेन्द्र प्रसाद बेनिवाल के अनुसार, मंदिर से जुड़ी कई प्राचीन मान्यताएं क्षेत्र में प्रचलित हैं। लोककथा के अनुसार, पुराने समय में क्षेत्र में चोरी और डकैती की घटनाओं से पहले माता अपने भक्तों को आगाह कर देती थीं। मान्यता है कि इसी बात से नाराज होकर चोर-डकैतों ने माता का शीश धड़ से अलग कर दिया था। इसके बाद से माता के शीश की ही पूजा की जाती है।

मूर्ति का धड़ कहां गया, इसकी स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं है। अरावली की गोद में स्थित बागौरी माता मंदिर धार्मिक आस्था के साथ क्षेत्र की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत का भी महत्वपूर्ण प्रतीक है। नवरात्र के दिनों में यहां भक्तिमय वातावरण बना रहता है।