प्रागपुरा रामलीला में विभीषण शरणागति, अंगद-रावण संवाद और लक्ष्मण शक्ति लीला का मंचन

कस्बे के रामलीला मैदान में श्री आदर्श रामलीला मंडल प्रागपुरा की ओर से आयोजित रामलीला में रामायण के प्रमुख प्रसंगों का प्रभावशाली मंचन किया गया। विभीषण शरणागति, अंगद-रावण संवाद और लक्ष्मण शक्ति लीला ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया। कलाकारों ने अपने अभिनय के माध्यम से भगवान श्रीराम की मर्यादा, भक्ति, त्याग और धर्म के महत्व को प्रस्तुत किया।

प्रागपुरा रामलीला में विभीषण शरणागति, अंगद-रावण संवाद और लक्ष्मण शक्ति लीला का मंचन
प्रागपुरा रामलीला में विभीषण शरणागति, अंगद-रावण संवाद और लक्ष्मण शक्ति लीला का मंचन

रामलीला के दौरान रावण द्वारा अपने छोटे भाई विभीषण का त्याग करने और प्रभु श्रीराम द्वारा उन्हें शरण देकर लंका का राजा बनाने का प्रसंग दिखाया गया। विभीषण का रावण का साथ छोड़कर श्रीराम की शरण में आना धर्म और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।

प्रागपुरा रामलीला में विभीषण शरणागति, अंगद-रावण संवाद और लक्ष्मण शक्ति लीला का मंचन
प्रागपुरा रामलीला में विभीषण शरणागति, अंगद-रावण संवाद और लक्ष्मण शक्ति लीला का मंचन

अंगद-रावण संवाद के मंचन में दिखाया गया कि भगवान श्रीराम युद्ध से पहले भी रावण को अपनी गलती सुधारने का अवसर देते हैं। श्रीराम अंगद को दूत बनाकर रावण के दरबार में भेजते हैं। अंगद रावण को माता सीता को सम्मानपूर्वक श्रीराम के पास लौटाने और क्षमा मांगकर विनाश से बचने का संदेश देते हैं। लेकिन अहंकार में डूबा रावण इस संदेश को स्वीकार करने के बजाय अंगद को बंदी बनाने का आदेश देता है। दोनों के बीच हुए संवाद ने दर्शकों में विशेष उत्सुकता पैदा की।

प्रागपुरा रामलीला में विभीषण शरणागति, अंगद-रावण संवाद और लक्ष्मण शक्ति लीला का मंचन
प्रागपुरा रामलीला में विभीषण शरणागति, अंगद-रावण संवाद और लक्ष्मण शक्ति लीला का मंचन

लक्ष्मण शक्ति लीला में मेघनाद के शक्ति प्रहार से लक्ष्मण के मूर्छित होने और उनके प्राण बचाने के लिए हनुमान जी के संजीवनी बूटी लेकर पहुंचने का दृश्य प्रस्तुत किया गया। संजीवनी मिलने के बाद लक्ष्मण की मूर्छा दूर होने के प्रसंग पर रामभक्त भावविभोर हो उठे। मंचन के माध्यम से संदेश दिया गया कि अहंकार व्यक्ति को सही निर्णय लेने से रोकता है, जबकि सत्य, धर्म और शरणागत की रक्षा का मार्ग कल्याणकारी होता है।

रामलीला में राम की भूमिका बिल्लू जांगिड़, लक्ष्मण की शिवम शर्मा, रावण की राजेन्द्र सोनी, विभीषण की रोहिताश्व सैनी, हनुमान की विष्णु टांक, सुग्रीव की मन्नालाल सैनी, समुद्र की अभिषेक जांगिड़, अंगद की ताराचंद जांगिड़ तथा मंदोदरी की भूमिका भूपेंद्र सेन ने निभाई। वहीं सत्यनारायण पाराशर और बद्री प्रसाद सैनी ने शुक-सारण के हास्य अभिनय से दर्शकों का मनोरंजन किया। अन्य कलाकारों ने भी अपनी भूमिकाओं का प्रभावी निर्वहन कर कार्यक्रम को सफल बनाया।

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