उत्तर प्रदेश के मेरठ में ब्रह्मपुरी क्षेत्र की सीओ सौम्या अस्थाना का करीब 29 सेकंड का एक ऑडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ है। ऑडियो में वह अधीनस्थ थाना परिसर में पत्रकारों द्वारा की जा रही वीडियोग्राफी पर मुकदमा दर्ज करने के निर्देश देती सुनाई दे रही हैं।

यह मामला टीपीनगर थाना से जुड़ा बताया जा रहा है। ऑडियो सामने आने के बाद मीडिया जगत और आमजन के बीच चर्चा तेज हो गई।
इस प्रकरण पर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अविनाश पांडेय ने स्पष्ट किया कि यह निर्देश प्रिंट या मान्यता प्राप्त मीडिया के लिए नहीं था। उनके अनुसार, यह टिप्पणी कुछ “पोर्टल संचालकों” के संदर्भ में थी, जो थाना परिसर में अनावश्यक और अव्यवस्थित तरीके से वीडियो बना रहे थे।
एसएसपी ने दोहराया कि मान्यता प्राप्त मीडिया के लिए किसी प्रकार का प्रतिबंध नहीं है। वहीं एडीजी भानु भास्कर ने भी कहा कि प्रिंट मीडिया पर कोई रोक नहीं है तथा संबंधित अधिकारी को आवश्यक समझाइश दी गई है।
उल्लेखनीय है कि न्यायालय पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि पुलिस थाने में वीडियोग्राफी करना Official Secrets Act, 1923 का उल्लंघन नहीं माना जाएगा, जब तक कि इससे सरकारी कार्य में बाधा उत्पन्न न हो।
राजस्थान के कोटपूतली-बहरोड़ जिला से निष्पक्ष छवि के लिए पहचाने जाने वाले पत्रकार “राजेश कुमार हाडिया” ने इस घटनाक्रम पर संतुलित प्रतिक्रिया दी।
उन्होंने कहा, “लोकतंत्र में मीडिया चौथा स्तंभ है। पुलिस और पत्रकार दोनों की जिम्मेदारी है कि मर्यादा और कानून के दायरे में रहकर कार्य करें। किसी भी प्रकार की गलतफहमी संवाद से दूर की जा सकती है। हमें टकराव नहीं, पारदर्शिता और सहयोग की भावना को आगे बढ़ाना चाहिए।”
राजेश कुमार हाडिया ने आगे कहा कि प्रिंट मीडिया सदैव तथ्यों पर आधारित निष्पक्ष पत्रकारिता के लिए प्रतिबद्ध रहा है। ऐसे मामलों में प्रशासन और मीडिया के बीच बेहतर समन्वय ही सकारात्मक संदेश देता है।
पूरा घटनाक्रम यह संकेत देता है कि बदलते डिजिटल दौर में जिम्मेदार पत्रकारिता और प्रशासनिक संयम दोनों आवश्यक हैं। स्पष्ट संवाद से ही भ्रम की स्थिति समाप्त होती है और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा संभव है।



