दीपावली के त्योहार पर बाजारों में मिट्टी के दीयों की रौनक देखते ही बन रही है। पावटा और प्रागपुरा कस्बों के मुख्य बाजारों में कुम्हार समाज के दुकानदारों की ओर से तैयार किए गए आकर्षक एवं रंग-बिरंगे मिट्टी के दीपक ग्राहकों को खूब लुभा रहे हैं। दीपावली की पूर्व संध्या पर दीये खरीदने के लिए महिलाओं, बच्चों और युवाओं की काफी भीड़ देखने को मिली।

इस बार बाजारों में पारंपरिक मिट्टी के दीयों के साथ विभिन्न आकार और डिजाइन के आकर्षक दीपक उपलब्ध हैं। इसके अलावा रंग-बिरंगे मिट्टी के बर्तन भी ग्राहकों की पसंद बने हुए हैं। लोग अपने घरों को पारंपरिक अंदाज में सजाने के लिए जमकर खरीदारी कर रहे हैं।

दीपक विक्रेता कृष्ण कुम्हार ने बताया कि इस वर्ष मिट्टी के दीयों की मांग पिछले साल की तुलना में अधिक है। लोग अब प्राकृतिक और पारंपरिक वस्तुओं को प्राथमिकता दे रहे हैं। वहीं प्रागपुरा निवासी सुभाष कुमावत ने कहा कि मिट्टी के दीये हमारी भारतीय संस्कृति और परंपराओं का अभिन्न हिस्सा हैं। इनका उपयोग पर्यावरण के अनुकूल होने के साथ ही हमारी सांस्कृतिक विरासत को भी जीवित रखता है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि मिट्टी के दीयों की खरीदारी केवल त्योहार की परंपरा नहीं, बल्कि स्थानीय कारीगरों की मेहनत और भारतीय संस्कृति के प्रति सम्मान का प्रतीक भी है। मिट्टी के दीये जलाकर दीपावली मनाने से कुम्हार परिवारों को भी रोजगार मिलता है। बाजारों में बढ़ती मांग से स्थानीय कुम्हारों के चेहरों पर भी खुशी नजर आ रही है।