निकाय चुनाव के बाद कोटपूतली-बहरोड़ जिले में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। मंगलवार को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर कांग्रेस के प्रदर्शन और कलेक्ट्रेट घेराव के बाद पूर्व विधायक एवं जिला कांग्रेस अध्यक्ष इन्द्राज गुर्जर के नेतृत्व में कांग्रेस नेताओं के प्रतिनिधिमंडल ने जिला कलेक्टर अर्पणा गुप्ता से मुलाकात की।

कांग्रेस नेताओं ने निकाय चुनाव के दौरान प्रशासन की कार्यशैली को लेकर अपनी आपत्तियां दर्ज कराईं। प्रतिनिधिमंडल में पूर्व कैबिनेट मंत्री शकुंतला रावत, पूर्व संसदीय सचिव रामस्वरूप कसाना, डीसीसी सचिव जगदीश मीणा और मुंडावर विधायक ललित यादव सहित अन्य नेता शामिल रहे।

इन्द्राज गुर्जर ने आरोप लगाया कि पावटा और कोटपूतली में निकाय अध्यक्ष के मतदान के दौरान पार्षदों के मतदान केंद्र तक पहुंचने की व्यवस्था में अंतर रखा गया। उनका आरोप था कि पावटा में कम दूरी के बावजूद पार्षदों को अलग-अलग तरीके से मतदान केंद्र तक ले जाया गया, जबकि कोटपूतली में पार्षदों को बस से मतदान के लिए ले जाने की अनुमति दी गई।
गुर्जर ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि कांग्रेस की ओर से इस संबंध में जिला प्रशासन के समक्ष आपत्तियां रखी गई हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन ने भाजपा और राज्य सरकार के दबाव में पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाया।
पूर्व संसदीय सचिव रामस्वरूप कसाना ने कहा कि चुनाव के दौरान प्रशासन की ओर से इस प्रकार का अंतर रखना उचित नहीं है। वहीं पूर्व कैबिनेट मंत्री शकुंतला रावत ने कहा कि यदि पंचायत चुनाव में भी इसी तरह की व्यवस्था अपनाई गई तो कांग्रेस इसका विरोध करेगी।
इसके बाद कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचा और एसपी सतवीर सिंह से मुलाकात की। कांग्रेस नेताओं ने मतदान केंद्रों पर पुलिस व्यवस्था को लेकर भी अपनी आपत्तियां दर्ज कराईं। जिलाध्यक्ष गुर्जर ने आरोप लगाया कि मतदान केंद्र पर DST के एक कांस्टेबल को मोबाइल फोन के साथ तैनात किया गया था तथा पुलिसकर्मियों की तैनाती को लेकर भी सवाल उठाए गए।
कांग्रेस नेताओं ने पंचायत चुनाव में निष्पक्ष एवं समान व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की। कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने जिला प्रशासन और पुलिस अधिकारियों से कहा कि आगामी पंचायत चुनाव में सभी प्रत्याशियों और जनप्रतिनिधियों के लिए समान व्यवस्था हो तथा मतदान प्रक्रिया को लेकर किसी भी पक्ष को शिकायत का अवसर नहीं मिले। नेताओं ने कहा कि चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखना प्रशासन की जिम्मेदारी है।