सीमावत्या में पैंथर का आतंक, एक ही रात में सात बकरियों का शिकार

निकटवर्ती ग्राम पंचायत कारोली की ढाणी सीमावत्या सहित काल्या सिकरया, पाछूडाला और आसपास की ढाणियों में पैंथर की लगातार मौजूदगी ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। पालतू पशुओं पर हो रहे हमलों के बीच सीमावत्या में मंगलवार देर रात पैंथर ने एक बाड़े में घुसकर सात बकरियों को अपना शिकार बना लिया। घटना के बाद ग्रामीणों में भय का माहौल है।

सीमावत्या में पैंथर का आतंक, एक ही रात में सात बकरियों का शिकार
सीमावत्या में पैंथर का आतंक, एक ही रात में सात बकरियों का शिकार

सामाजिक कार्यकर्ता विनोद सिंह कारोली के अनुसार सीमावत्या निवासी लक्ष्मण सिंह ने अपने कच्चे मकान के पास बने बाड़े में सात बकरियां बांध रखी थीं। रात के समय पैंथर बाड़े में घुस आया और सभी बकरियों पर हमला कर दिया। चार बकरियों को मारने के बाद वहीं छोड़ दिया, जबकि तीन बकरियों को पैंथर नाले के रास्ते पहाड़ी क्षेत्र की ओर उठा ले गया।

सीमावत्या में पैंथर का आतंक, एक ही रात में सात बकरियों का शिकार
सीमावत्या में पैंथर का आतंक, एक ही रात में सात बकरियों का शिकार

घटना का पता बुधवार तड़के करीब पांच बजे चला। लक्ष्मण सिंह और उनकी पत्नी जब दूध निकालने के लिए उठे और बाड़े में पहुंचे तो वहां बकरियां मृत अवस्था में पड़ी मिलीं। यह दृश्य देखकर परिवार में हड़कंप मच गया। उनकी आवाज सुनकर आसपास के ग्रामीण भी मौके पर पहुंचे और पीड़ित परिवार को ढांढस बंधाया।

घटना की सूचना सामाजिक कार्यकर्ता विनोद सिंह ने दूरभाष से वन विभाग के कर्मचारियों तथा राजनौता पशु चिकित्सक को दी। इसके बाद वनरक्षक यादराम, पशु चिकित्सक प्रमोद यादव, पटवारी विजय यादव, सेकेट्री बाबूलाल यादव तथा महेन्द्र पंवार सहित टीम मौके पर पहुंची। टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण कर घटना से संबंधित परिस्थितियों का जायजा लिया।

वनरक्षक यादराम ने बताया कि क्षेत्र पहाड़ी होने के कारण मौके पर पैंथर के स्पष्ट पगमार्क दिखाई नहीं दिए। मृत बकरियों के पोस्टमार्टम के बाद ही उनकी मौत के कारणों की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। वन विभाग की टीम ने ग्रामीणों को विशेष सावधानी बरतने और रात के समय अकेले बाहर नहीं निकलने की सलाह दी।

ग्रामीणों के अनुसार यह क्षेत्र लंबे समय से पैंथर की गतिविधियों से प्रभावित रहा है। पाछूडाला क्षेत्र के सुंदराला सहित विभिन्न ढाणियों में पूर्व में भी पैंथर द्वारा पालतू पशुओं पर हमले की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। ग्रामीणों ने बताया कि पैंथर द्वारा बकरियों और गौवंश को निशाना बनाए जाने से पशुपालकों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है।

पूर्व में पाछूडाला क्षेत्र में चरवाहों की मौजूदगी के दौरान भी पैंथर द्वारा गौवंश पर हमला करने की घटना सामने आई थी। इसके अलावा ग्रामीणों ने घरों और बाड़ों में घुसकर बकरियों के शिकार किए जाने की शिकायतें भी की थीं। इन घटनाओं के बाद ग्रामीणों की ओर से वन विभाग से पैंथर को पकड़ने के लिए पिंजरा लगाने तथा पालतू पशुओं की सुरक्षा के ठोस इंतजाम करने की मांग उठती रही है।

ग्रामीणों ने बताया कि लक्ष्मण सिंह की आर्थिक स्थिति कमजोर है और वह बकरी पालन के माध्यम से अपने परिवार का भरण-पोषण करता था। एक ही रात में सात बकरियों के मारे जाने से परिवार को बड़ा आर्थिक नुकसान हुआ है। ग्रामीणों ने वन विभाग एवं प्रशासन से नियमानुसार आर्थिक सहायता अथवा मुआवजा दिलाने की मांग की है।

ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में पैंथर की गतिविधियां लगातार बनी हुई हैं। ऐसे में केवल घटना के बाद निरीक्षण करने के बजाय वन विभाग को पैंथर की आवाजाही वाले क्षेत्रों को चिह्नित कर निगरानी बढ़ाने तथा पशुपालकों को सुरक्षा के उपाय उपलब्ध कराने की आवश्यकता है। घटनास्थल पर विनोद सिंह, श्रवण सिंह, रामसिंह, छाजू सिंह, बिरजू सिंह, गिर्राज सिंह, सतपाल सिंह, देशराज सिंह, अमर सिंह, महेन्द्र सिंह सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।

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