कोटपूतली। विदेश से एमबीबीएस की डिग्री हासिल करने के बाद भारत में डॉक्टर के रूप में प्रैक्टिस करने के लिए जरूरी एफएमजीई स्क्रीनिंग परीक्षा पास नहीं कर पाने के बावजूद फर्जी प्रमाण-पत्र के सहारे चिकित्सा क्षेत्र में प्रवेश करने वाले नेटवर्क का एसओजी ने खुलासा किया है। इस मामले में कोटपूतली-बहरोड़ जिले से जुड़े एक डॉक्टर समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। सबसे गंभीर बात यह सामने आई है कि गिरफ्तार आरोपियों में शामिल नरेश रोलानिया कोटपूतली के एक निजी अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में बिना एफएमजीई स्क्रीनिंग परीक्षा पास किए मरीजों का उपचार कर रहा था।

एसओजी की जांच के अनुसार कोटपूतली-बहरोड़ जिले के बामनवास निवासी नरेश रोलानिया पुत्र ओमप्रकाश ने वर्ष 2021 में कजाकिस्तान से एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी की और भारत लौट आया था। उसने एनबीई की ओर से आयोजित एफएमजीई स्क्रीनिंग परीक्षा तीन बार दी, लेकिन सफल नहीं हो सका। इसके बाद उसके रिश्तेदार नरेन्द्र नामक व्यक्ति के माध्यम से करीब 26 लाख रुपये में कथित तौर पर फर्जी एफएमजीई प्रमाण-पत्र तैयार कराया गया। इसी प्रमाण-पत्र के आधार पर उसने उदयपुर मेडिकल कॉलेज से इंटर्नशिप की।
पुलिस के मुताबिक, इंटर्नशिप पूरी करने के बाद नरेश रोलानिया कोटपूतली के एक निजी अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में मरीजों का उपचार करने लगा। जांच में आरोप है कि वह बिना एफएमजीई स्क्रीनिंग परीक्षा पास किए और बिना वैध राजस्थान मेडिकल काउंसिल पंजीयन के चिकित्सा सेवाएं दे रहा था। पुलिस अब उसके द्वारा उपचार किए गए मरीजों, अस्पताल में उसकी नियुक्ति और उसके दस्तावेजों के आधार पर किए गए पंजीयन की भी जांच कर रही है।
एसओजी की जांच में सामने आया है कि विदेश से एमबीबीएस करने के बाद एफएमजीई परीक्षा में सफल नहीं हो पाने वाले अभ्यर्थियों को कथित तौर पर फर्जी प्रमाण-पत्र उपलब्ध कराए जाते थे। इसके लिए प्रति व्यक्ति 20 से 30 लाख रुपये तक वसूले जाने की बात सामने आई है। इन प्रमाण-पत्रों के आधार पर राजस्थान मेडिकल काउंसिल में पंजीयन और मेडिकल कॉलेजों में इंटर्नशिप का रास्ता तैयार किया जाता था।
इसी नेटवर्क में गिरफ्तार दूसरे आरोपी आशीन कुमार शर्मा ने भी कजाकिस्तान से एमबीबीएस किया था। वह एफएमजीई परीक्षा में तीन बार असफल रहा। पुलिस के अनुसार, उसने शुभम गुर्जर के माध्यम से करीब 25 लाख रुपये में फर्जी प्रमाण-पत्र तैयार कराया और उसके आधार पर राजकीय मेडिकल कॉलेज करौली से इंटर्नशिप की।
तीसरा आरोपी राजेन्द्र कुमार यादव चीन से वर्ष 2006 से 2012 तक एमबीबीएस करने के बाद भारत लौटा था। उसने एफएमजीई परीक्षा आठ बार दी, लेकिन सफल नहीं हुआ। इसके बाद बहरोड़ निवासी संदीप के माध्यम से करीब 29 लाख रुपये में फर्जी एफएमजीई प्रमाण-पत्र तैयार कराने का आरोप है। पुलिस के अनुसार, इस प्रमाण-पत्र के आधार पर उसने राजस्थान मेडिकल काउंसिल में पंजीयन के लिए आवेदन किया था।
25 से 30 लाख रुपये तक में तैयार होते थे फर्जी प्रमाण-पत्र
एसओजी की जांच में सामने आया है कि विदेश से एमबीबीएस करने के बाद एफएमजीई परीक्षा में सफल नहीं हो पाने वाले अभ्यर्थियों को कथित तौर पर फर्जी प्रमाण-पत्र उपलब्ध कराए जाते थे। इसके लिए प्रति व्यक्ति 20 से 30 लाख रुपये तक वसूले जाने की बात सामने आई है। इन प्रमाण-पत्रों के आधार पर राजस्थान मेडिकल काउंसिल में पंजीयन और मेडिकल कॉलेजों में इंटर्नशिप का रास्ता तैयार किया जाता था।
इसी नेटवर्क में गिरफ्तार दूसरे आरोपी आशीन कुमार शर्मा ने भी कजाकिस्तान से एमबीबीएस किया था। वह एफएमजीई परीक्षा में तीन बार असफल रहा। पुलिस के अनुसार, उसने शुभम गुर्जर के माध्यम से करीब 25 लाख रुपये में फर्जी प्रमाण-पत्र तैयार कराया और उसके आधार पर राजकीय मेडिकल कॉलेज करौली से इंटर्नशिप की।
तीसरा आरोपी राजेन्द्र कुमार यादव चीन से वर्ष 2006 से 2012 तक एमबीबीएस करने के बाद भारत लौटा था। उसने एफएमजीई परीक्षा आठ बार दी, लेकिन सफल नहीं हुआ। इसके बाद बहरोड़ निवासी संदीप के माध्यम से करीब 29 लाख रुपये में फर्जी एफएमजीई प्रमाण-पत्र तैयार कराने का आरोप है। पुलिस के अनुसार, इस प्रमाण-पत्र के आधार पर उसने राजस्थान मेडिकल काउंसिल में पंजीयन के लिए आवेदन किया था।
एसओजी के अधिकारियों के अनुसार जांच के दौरान फर्जी एफएमजीई प्रमाण-पत्र तैयार कराने वाले नेटवर्क से जुड़े विदेश से एमबीबीएस करने वाले 100 से अधिक लोगों को चिन्हित किया जा चुका है। इनमें से करीब 30 लोगों को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। पुलिस अब फर्जी प्रमाण-पत्र तैयार करने वाले लोगों, बिचौलियों और पंजीयन प्रक्रिया में कथित रूप से मदद करने वाले अन्य लोगों की भूमिका खंगाल रही है।
जांच में यह भी सामने आया है कि फर्जी प्रमाण-पत्र के आधार पर इंटर्नशिप करने और राजस्थान मेडिकल काउंसिल में पंजीयन कराने के लिए डॉक्टरों से लाखों रुपये लिए जाते थे। एसओजी अधिकारियों के मुताबिक इस नेटवर्क में पहले गिरफ्तार किए जा चुके आरोपियों से पूछताछ के आधार पर जांच का दायरा लगातार बढ़ाया जा रहा है।
100 से अधिक संदिग्ध चिन्हित, 30 गिरफ्तार
एसओजी के अधिकारियों के अनुसार जांच के दौरान फर्जी एफएमजीई प्रमाण-पत्र तैयार कराने वाले नेटवर्क से जुड़े विदेश से एमबीबीएस करने वाले 100 से अधिक लोगों को चिन्हित किया जा चुका है। इनमें से करीब 30 लोगों को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। पुलिस अब फर्जी प्रमाण-पत्र तैयार करने वाले लोगों, बिचौलियों और पंजीयन प्रक्रिया में कथित रूप से मदद करने वाले अन्य लोगों की भूमिका खंगाल रही है।
जांच में यह भी सामने आया है कि फर्जी प्रमाण-पत्र के आधार पर इंटर्नशिप करने और राजस्थान मेडिकल काउंसिल में पंजीयन कराने के लिए डॉक्टरों से लाखों रुपये लिए जाते थे। एसओजी अधिकारियों के मुताबिक इस नेटवर्क में पहले गिरफ्तार किए जा चुके आरोपियों से पूछताछ के आधार पर जांच का दायरा लगातार बढ़ाया जा रहा है।
14 अगस्त को अदालत में पेश किए गए आरोपी
एसओजी ने गिरफ्तार तीनों आरोपियों को 14 अगस्त 2026 को जयपुर महानगर द्वितीय के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया। अदालत से आरोपियों की पुलिस हिरासत प्राप्त हुई है। अब पूछताछ के दौरान फर्जी प्रमाण-पत्र तैयार कराने वाले नेटवर्क, रकम के लेन-देन, मेडिकल कॉलेजों में इंटर्नशिप और राजस्थान मेडिकल काउंसिल में हुए पंजीयन से जुड़ी कड़ियों को खंगाला जाएगा।
कोटपूतली में एक आरोपी के निजी अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड तक पहुंचने के मामले ने जांच को स्थानीय स्तर पर भी गंभीर बना दिया है। अब यह सवाल भी जांच के केंद्र में है कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर तैयार हुए ऐसे प्रमाण-पत्रों के सहारे कितने लोग राजस्थान में मरीजों का उपचार कर रहे हैं और संबंधित संस्थानों में उनकी नियुक्ति एवं पंजीयन की प्रक्रिया में किन लोगों की भूमिका रही।
