श्री आदर्श रामलीला मंडल की ओर से चतुर्भुज मंदिर परिसर स्थित रामलीला मैदान में चल रहे आयोजन में मंगलवार रात रावण जन्म का प्रसंग प्रस्तुत किया गया। पौराणिक कथा के इस महत्वपूर्ण प्रसंग को कलाकारों ने संवाद और अभिनय के जरिए प्रभावी रूप से मंच पर उतारा। रामलीला में दर्शाया गया कि राक्षस माता कैकसी के गर्भ से 12 वर्ष बाद रावण का जन्म हुआ।

कैकसी का विवाह ऋषि पुलस्त्य के पुत्र विश्रवा से हुआ था। रावण के जन्म के समय प्रकृति में आए बदलावों और वातावरण में बने असामान्य हालात को भी मंचन में दर्शाया गया। कथा के आगे बढ़ने के साथ कुंभकर्ण, विभीषण, मेघनाद और शूर्पणखा से जुड़े प्रसंगों की पृष्ठभूमि भी सामने आई।

रावण का अभिनय राजेंद्र सोनी ने किया। कुंभकर्ण की भूमिका कमलेश सेन, विभीषण की रोहिताश सैनी, मयदानव की अभिषेक जांगिड़ और मेघनाद की मन्नालाल सैनी ने निभाई। ब्रह्मा के पात्र में सत्यनारायण पाराशर, मंदोदरी के रूप में गिरिराज तथा नकलची की भूमिका में बद्री प्रसाद सैनी नजर आए।

मंडल अध्यक्ष अनिल शर्मा ने आयोजन को स्थानीय कलाकारों के लिए महत्वपूर्ण मंच बताते हुए कहा कि रामलीला के माध्यम से कलाकारों को अपनी प्रतिभा दिखाने के साथ युवाओं को भारतीय संस्कृति और परंपराओं से जोड़ने का अवसर मिलता है।
संरक्षक राधेश्याम जांगिड़ ने कहा कि रामलीला जैसे आयोजन समाज की सामूहिक सहभागिता से ही निरंतर आगे बढ़ते हैं। उन्होंने कलाकारों की मेहनत और आयोजन में सहयोग कर रहे लोगों की सराहना की।
इस दौरान पूर्व जिला पार्षद ललित गोयल, श्याम सुंदर शर्मा, राजेंद्र सोनी, शक्ति सिंह शेखावत, बल्लू शर्मा, मनोज सोनी, महेश कुमार सैनी, उमेश पाराशर, नरेश कुमार स्वामी, अजय पारीक सहित रामलीला मंडल के पदाधिकारी, कलाकार एवं दर्शक मौजूद रहे।