“अंत भला तो सब भला एवं अहंकार का विनाश निश्चित है” इन संदेशों को साकार करती भगवान श्रीराम की विजयगाथा के साथ प्रागपुरा की रामलीला का समापन हुआ। श्री आदर्श रामलीला मंडल की ओर से रामलीला मैदान में आयोजित मंचन की अंतिम रात दर्शकों ने कुंभकरण वध, मेघनाद वध, अहिरावण वध, रावण वध, भरत मिलाप और भगवान श्रीराम के राज्याभिषेक के प्रसंग देखे। युद्ध के रोमांचक दृश्यों से लेकर अयोध्या में रामराज्य की स्थापना तक कलाकारों ने रामायण के प्रसंगों को जीवंत किया।

समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे पावटा-प्रागपुरा नगरपालिका अध्यक्ष प्रतिनिधि एवं जिला कांग्रेस महासचिव अजय सैनी ने भगवान श्रीराम के जीवन को मानवता के लिए प्रेरणास्रोत बताया। उन्होंने कहा कि प्रभु श्रीराम का चरित्र मर्यादा, नैतिकता, त्याग, कर्तव्य और आदर्श जीवन का प्रतीक है। उनके सिद्धांतों का अनुसरण कर समाज और मानव कल्याण के लिए काम करना चाहिए।

इस दौरान अजय सैनी ने भगवान श्रीराम के चरणों में 5100 रुपए भेंट किए। इसके अलावा 5500 रुपए की पर्स भेंट करने तथा रामलीला परिसर में बने गड्ढों को भरकर समतलीकरण करने के लिए 4000 रुपए की मिट्टी डलवाने की घोषणा की। उनकी इन घोषणाओं का उद्देश्य धार्मिक आयोजन के प्रति सहयोग के साथ परिसर की स्थिति में सुधार करना भी रहा।

मंचन में दिखाया गया कि लक्ष्मण के स्वस्थ होने की खबर से रावण बेचैन हो उठता है और कुंभकरण को युद्ध के लिए भेजता है। कुंभकरण रावण को उसके गलत निर्णयों के प्रति आगाह करता है, लेकिन वह युद्ध में उतर जाता है और श्रीराम के हाथों मारा जाता है। इसके बाद मेघनाद मोर्चा संभालता है, मगर लक्ष्मण उसका वध कर देते हैं। लगातार मिल रही पराजय से परेशान रावण अहिरावण की सहायता लेता है।

अहिरावण छलपूर्वक श्रीराम और लक्ष्मण को पाताल लोक ले जाता है। हनुमानजी उनका पता लगाते हुए पाताल लोक पहुंचते हैं, जहां द्वारपाल मकरध्वज से उनका सामना होता है। इसके बाद हनुमानजी अहिरावण का वध कर दोनों भाइयों को उसके चंगुल से छुड़ा लेते हैं। मेघनाद की पत्नी सुलोचना के विलाप का दृश्य भी प्रस्तुत किया गया।

अपने परिजनों और प्रमुख योद्धाओं के मारे जाने के बावजूद रावण अपने अहंकार का त्याग नहीं करता। वह स्वयं श्रीराम से युद्ध करता है। रणभूमि में दोनों के बीच भीषण संग्राम होता है। श्रीराम के बाणों से रावण के सिर कटने के बाद भी उसके नए सिर निकल आते हैं। तब विभीषण श्रीराम को उसकी नाभि में अमृत होने की जानकारी देते हैं। इसके बाद श्रीराम ब्रह्मास्त्र से रावण की नाभि पर निशाना साधते हैं और दशानन धराशायी हो जाता है। इस दृश्य के साथ सत्य की विजय और अधर्म के अंत का संदेश दिया गया।

रावण वध के बाद हनुमानजी भरत को श्रीराम के अयोध्या लौटने का संदेश देते हैं। पुष्पक विमान से अयोध्या आगमन और भरत मिलाप का मंचन दर्शकों के लिए विशेष आकर्षण रहा। इसके पश्चात विधि-विधान से पूजन, श्रीराम स्तुति और आरती की गई। गुरु वशिष्ठ ने भगवान श्रीराम का राजतिलक किया। अतिथियों ने श्रीराम और माता सीता का तिलक कर राजमुकुट पहनाया तथा क्षेत्र की सुख-शांति और समृद्धि की कामना की।

मंचन में बिल्लू जांगिड़ ने श्रीराम, शिवम शर्मा ने लक्ष्मण, अभिषेक जांगिड़ ने भरत, देवेश यादव ने शत्रुघ्न, सत्यनारायण पाराशर ने गुरु वशिष्ठ, भूपेंद्र सेन ने कौशल्या, विष्णु टांक ने हनुमान, कमलेश सेन ने सुग्रीव, ध्रुव सोनी ने अंगद, राजेंद्र सोनी ने रावण, रोहिताश्व सैनी ने विभीषण और बद्री प्रसाद सैनी ने नकलची की भूमिका निभाई। अन्य कलाकारों ने भी अलग-अलग पात्रों का अभिनय कर प्रस्तुति को सफल बनाया।
समापन अवसर पर श्री आदर्श रामलीला मंडल ने अतिथियों का माल्यार्पण कर स्वागत किया और स्मृति चिह्न भेंट किए। रामलीला में भूमिका निभाने वाले कलाकारों को सम्मानित किया गया। मंडल संरक्षक राधेश्याम जांगिड़ व अध्यक्ष अनिल शर्मा ने आयोजन को सफल बनाने में सहयोग करने वाले सभी सहयोगियों, कलाकारों और क्षेत्रवासियों का आभार व्यक्त किया।