पावटा क्षेत्र के गोगा नवमी पर प्रागपुरा में उमड़ी आस्था, बारिश ने मेले की रंगत की फीकी

लोक आस्था, परंपरा और सामाजिक समरसता का प्रतीक प्रागपुरा का जाहर गोगा पीर मंदिर शनिवार को गोगा नवमी के अवसर पर श्रद्धालुओं से गुलजार रहा। सुबह से ही आसपास के गांवों सहित दूर-दराज से श्रद्धालुओं के मंदिर पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया, जो देर शाम तक जारी रहा। हालांकि दिनभर रुक-रुककर हुई बारिश के चलते इस बार मेले की रौनक पिछले वर्षों की अपेक्षा कुछ फीकी नजर आई।

पावटा क्षेत्र के गोगा नवमी पर प्रागपुरा में उमड़ी आस्था, बारिश ने मेले की रंगत की फीकी
पावटा क्षेत्र के गोगा नवमी पर प्रागपुरा में उमड़ी आस्था, बारिश ने मेले की रंगत की फीकी

बारिश के बावजूद श्रद्धालुओं की आस्था पर मौसम का असर नहीं पड़ा। कई लोग छाता लेकर मंदिर पहुंचे, गोगाजी महाराज के दर्शन कर धोक लगाई और प्रसाद व झंडी अर्पित कर अपनी मन्नतें मांगी। श्रद्धालुओं का आना-जाना दिनभर जारी रहा। बड़ी संख्या में लोग अपने निजी वाहनों से पहुंचे, वहीं आसपास के गांवों से कई श्रद्धालु पैदल भी मंदिर तक पहुंचे।

पावटा क्षेत्र के गोगा नवमी पर प्रागपुरा में उमड़ी आस्था, बारिश ने मेले की रंगत की फीकी
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श्रद्धालुओं ने मंदिर में प्रसाद, झंडी, छत्र एवं अन्य पूजन सामग्री अर्पित की। महिलाओं ने रक्षा सूत्र व राखियां चढ़ाकर श्रद्धा व्यक्त की। अनेक परिवार घरों में तैयार किए गए पकवान लेकर मंदिर पहुंचे और गोगाजी महाराज को भोग लगाया। मंदिर परिसर में जयकारों और भजन-सत्संग से वातावरण भक्तिमय बना रहा।

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लगातार बारिश के चलते इस बार मेले में लगने वाली दुकानों की संख्या भी पिछले वर्षों की तुलना में कम दिखाई दी। खासकर खिलौनों की दुकानें कम नजर आईं, जिससे बच्चों के लिए मेले का आकर्षण कुछ कम रहा। हालांकि जो दुकानें लगीं, वहां श्रद्धालुओं ने अपनी जरूरत के अनुसार खरीदारी की।

पावटा क्षेत्र के गोगा नवमी पर प्रागपुरा में उमड़ी आस्था, बारिश ने मेले की रंगत की फीकी
पावटा क्षेत्र के गोगा नवमी पर प्रागपुरा में उमड़ी आस्था, बारिश ने मेले की रंगत की फीकी

बारिश के कारण कई लोग ज्यादा देर तक मेला क्षेत्र में रुकने के बजाय मंदिर में दर्शन और धोक लगाने के बाद वापस लौटते दिखाई दिए। इसके बावजूद श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रही और मंदिर परिसर में दिनभर चहल-पहल देखने को
मिली।

प्रागपुरा का जाहर गोगा पीर मंदिर धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक सौहार्द और आपसी भाईचारे की परंपरा के लिए भी जाना जाता है। स्थानीय मान्यता के अनुसार लंबे समय से विभिन्न समुदायों के लोग यहां श्रद्धा के साथ पहुंचते रहे हैं। हिन्दू समाज गोगाजी महाराज या जाहरवीर के रूप में उनकी पूजा करता है, वहीं मुस्लिम समाज में उन्हें गोगापीर के नाम से श्रद्धा से याद किया जाता है। सिख समुदाय के लोगों की सहभागिता भी इस साझा आस्था की परंपरा को मजबूती देती है।

लोकमान्यता में गोगाजी को सर्पों के देवता, गौ-रक्षक और जनकल्याणकारी लोकनायक के रूप में पूजा जाता है। गोगा नवमी पर श्रद्धालु घरों में विभिन्न पकवान बनाकर भोग लगाते हैं तथा मंदिर पहुंचकर झंडी, छत्र और प्रसाद चढ़ाने की परंपरा निभाते हैं।

गोगा नवमी के मेले में बारिश ने भले ही दुकानदारों और मेले की रौनक को प्रभावित किया हो, लेकिन श्रद्धालुओं की आस्था कमजोर नहीं पड़ी। बुजुर्गों से लेकर महिलाओं, युवाओं और बच्चों तक लोग मौसम की परवाह किए बिना मंदिर पहुंचे। लोगों के लिए मेले से ज्यादा गोगाजी महाराज के दर्शन और धोक लगाना प्राथमिकता रहा।

मेले के दौरान कानून एवं व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रागपुरा थानाधिकारी भजनाराम के नेतृत्व में पुलिस जाप्ता तैनात रहा। पुलिसकर्मियों ने मंदिर एवं आसपास के मेला क्षेत्र में व्यवस्था संभाली और श्रद्धालुओं की आवाजाही पर नजर रखी।

बारिश के बीच आयोजित गोगा नवमी का यह मेला इस बार भले ही पिछले वर्षों जितना रंगीन और चहल-पहल वाला नजर नहीं आया, लेकिन श्रद्धालुओं की मौजूदगी ने यह जरूर साबित कर दिया कि मौसम बदल सकता है, मेले की रौनक कम हो सकती है, लेकिन लोक आस्था की परंपरा अपनी जगह कायम रहती है।

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