पावटा में चुनावी वादों के बीच प्रागपुरा की सफाई व्यवस्था पर सवाल, कचरे से अटे पड़े डस्टबिन

नगरपालिका पावटा-प्रागपुरा के चुनावी माहौल में प्रत्याशी विकास, स्वच्छता और बेहतर नागरिक सुविधाओं के वादों के साथ मतदाताओं तक पहुंच रहे हैं, लेकिन दूसरी ओर प्रागपुरा कस्बे की मौजूदा सफाई व्यवस्था इन दावों की जमीनी हकीकत पर सवाल खड़े कर रही है। कस्बे के प्रमुख स्थानों पर रखे कचरा पात्र लंबे समय से खाली नहीं होने के कारण ओवरफ्लो हो चुके हैं और कचरा सड़क किनारे फैल रहा है।

पावटा में चुनावी वादों के बीच प्रागपुरा की सफाई व्यवस्था पर सवाल, कचरे से अटे पड़े डस्टबिन
पावटा में चुनावी वादों के बीच प्रागपुरा की सफाई व्यवस्था पर सवाल, कचरे से अटे पड़े डस्टबिन

प्रागपुरा पुलिस थाने के मुख्य गेट के सामने हाईवे की सर्विस लेन पर रखा कचरा पात्र इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है। कचरा पात्र भर जाने के बाद कचरा आसपास फैल रहा है। यही स्थिति डाकघर के सामने रखे डस्टबिन की भी बताई जा रही है। डस्टबिन से बाहर निकला कचरा सड़क किनारे बिखरा पड़ा है और आवारा पशु दिनभर उसमें मुंह मारते नजर आते हैं।

पावटा में चुनावी वादों के बीच प्रागपुरा की सफाई व्यवस्था पर सवाल, कचरे से अटे पड़े डस्टबिन
पावटा में चुनावी वादों के बीच प्रागपुरा की सफाई व्यवस्था पर सवाल, कचरे से अटे पड़े डस्टबिन

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि इन स्थानों पर नियमित रूप से कचरा नहीं उठाया जा रहा है। करीब एक माह से स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं होने के कारण गंदगी लगातार बढ़ रही है। हवा चलने पर पॉलीथिन और हल्का कचरा आसपास फैल जाता है, जिससे राहगीरों, दुकानदारों और स्थानीय लोगों को परेशानी उठानी पड़ रही है।

पावटा में चुनावी वादों के बीच प्रागपुरा की सफाई व्यवस्था पर सवाल, कचरे से अटे पड़े डस्टबिन
पावटा में चुनावी वादों के बीच प्रागपुरा की सफाई व्यवस्था पर सवाल, कचरे से अटे पड़े डस्टबिन

सफाई की समस्या केवल मुख्य मार्गों तक सीमित नहीं है। नगरपालिका क्षेत्र के कई वार्डों और कॉलोनियों में नालियों की नियमित सफाई नहीं होने की शिकायतें भी सामने आ रही हैं। नालियों में कचरा जमा होने से दुर्गंध का वातावरण बना हुआ है। कई स्थानों पर कचरे के ढेर भी दिखाई दे रहे हैं।

स्थानीय लोगों के अनुसार घर-घर कचरा संग्रहण की व्यवस्था भी कई वार्डों में नियमित नहीं है। लोगों का कहना है कि कचरा संग्रहण वाहन निर्धारित समय पर नहीं पहुंचते। कई बार वाहन सुबह के बजाय काफी लेट वार्डों में पहुंचते हैं, तब तक लोग अपने कामकाज के लिए घरों से निकल चुके होते हैं। ऐसी स्थिति में घरों में जमा कचरे के निस्तारण को लेकर लोगों के सामने परेशानी खड़ी हो जाती है।

नगरपालिका की सफाई व्यवस्था के लिए बड़े स्तर पर बजट और ठेका व्यवस्था होने के बावजूद यदि कचरा पात्र समय पर खाली नहीं हो रहे और नालियों की नियमित सफाई नहीं हो पा रही है, तो सफाई कार्य की निगरानी और जिम्मेदारी तय करने की व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि सफाई व्यवस्था केवल चुनाव के समय चर्चा का विषय नहीं होनी चाहिए। शहर में नियमित सफाई, कचरा उठाव और नालियों की सफाई जैसी सुविधाएं नगरपालिका की मूल जिम्मेदारियों में शामिल हैं। ऐसे में नागरिकों को आश्वासनों के बजाय नियमित और दिखाई देने वाला काम चाहिए।

नगरपालिका चुनाव के बीच सफाई व्यवस्था का मुद्दा अब वार्डों में होने वाली चर्चाओं का हिस्सा बनता दिखाई दे रहा है। प्रत्याशी मतदाताओं के सामने विकास का एजेंडा रख रहे हैं, वहीं नागरिकों का कहना है कि सड़क, नाली, सफाई और कचरा प्रबंधन जैसे बुनियादी मुद्दों पर जवाबदेही भी तय होनी चाहिए।

लोगों का सवाल है कि यदि शहर के प्रमुख स्थानों पर रखे कचरा पात्र समय पर खाली नहीं हो पा रहे हैं और वार्डों में नियमित सफाई व्यवस्था सुनिश्चित नहीं है, तो नई नगरपालिका बोर्ड से किस तरह की व्यवस्था की उम्मीद की जाए?

कचरे के ढेर और जाम नालियों के कारण दुर्गंध तथा मच्छरों की समस्या बढ़ने की शिकायतों के बीच स्थानीय नागरिकों ने नगरपालिका प्रशासन से कचरा पात्रों की नियमित सफाई, नालियों की समयबद्ध सफाई, घर-घर कचरा संग्रहण वाहनों की नियमितता तथा सफाई व्यवस्था की प्रभावी मॉनिटरिंग सुनिश्चित करने की मांग की है।

नागरिकों की मांग स्पष्ट है की चुनावी वादों से आगे बढ़कर अब धरातल पर स्वच्छ और व्यवस्थित प्रागपुरा चाहिए। नगरपालिका प्रशासन समय रहते व्यवस्था में सुधार करता है तो आमजन को राहत मिलने के साथ चुनाव के बीच उठ रहा यह महत्वपूर्ण स्थानीय मुद्दा भी शांत हो सकता है।

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