पावटा (राजेश कुमार हाडिया)। नगरपालिका पावटा-प्रागपुरा क्षेत्र सहित आसपास के ग्रामीण इलाकों में इस वर्ष शनि जयंती को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह और श्रद्धा का माहौल देखने को मिल रहा है। ज्येष्ठ मास की कृष्ण पक्ष अमावस्या पर मनाई जाने वाली शनि जयंती इस बार 16 मई, शनिवार को पड़ रही है। विशेष बात यह है कि करीब 13 वर्षों बाद शनि जयंती शनिवार के दिन आ रही है, जिसे धार्मिक दृष्टि से अत्यंत शुभ माना जा रहा है। वहीं ज्योतिषाचार्यों के अनुसार लगभग 300 वर्षों बाद कई दुर्लभ शुभ योगों का संयोग भी बन रहा है, जिससे इस बार की शनि जयंती का महत्व और अधिक बढ़ गया है।

शनि जयंती को लेकर पावटा कस्बे के भौनावास मार्ग, प्रागपुरा कस्बे की खोड़ा कॉलोनी स्थित शनि मंदिर सहित क्षेत्र के विभिन्न शनिदेव मंदिरों में विशेष तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। मंदिरों को आकर्षक रोशनी, फूल-मालाओं और रंग-बिरंगी सजावट से सजाया जा रहा है। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशेष व्यवस्थाएं भी की जा रही हैं, ताकि दर्शनार्थियों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।

शनि जयंती के अवसर पर प्रातःकाल शनिदेव का सरसों के तेल से विशेष अभिषेक किया जाएगा। इसके बाद नई पोशाक धारण कराकर खीर एवं इमरती का भोग लगाया जाएगा तथा श्रद्धालुओं में प्रसाद वितरण किया जाएगा। दिनभर श्रद्धालु “ॐ शं शनैश्चराय नमः” मंत्र का जाप, शनि चालीसा पाठ एवं पूजा-अर्चना करेंगे। वहीं शाम के समय भव्य महाआरती, सुंदरकांड पाठ एवं भजन-कीर्तन जैसे धार्मिक कार्यक्रम आयोजित होंगे, जिनमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है।
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इस बार शनि जयंती पर शश महापुरुष योग, गजकेसरी योग, बुधादित्य योग एवं सौभाग्य योग जैसे दुर्लभ शुभ संयोग बन रहे हैं। बताया जा रहा है कि शनिदेव वर्तमान में अपनी स्वयं की राशि कुंभ में विराजमान हैं, जिससे शश महापुरुष योग का निर्माण हो रहा है। यह योग नेतृत्व क्षमता, करियर में सफलता एवं जीवन में स्थिरता प्रदान करने वाला माना जाता है। वहीं गजकेसरी योग मान-सम्मान एवं प्रतिष्ठा में वृद्धि का संकेत देता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शनि जयंती पर काले तिल, सरसों के तेल का दीपदान, दान-पुण्य एवं शनि मंत्रों का जाप विशेष फलदायी माना जाता है। यही कारण है कि नगरपालिका पावटा-प्रागपुरा क्षेत्र सहित आसपास के गांवों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के मंदिरों में पहुंचने की संभावना जताई जा रही है।
शनि जयंती को लेकर बाजारों में भी रौनक बढ़ गई है। पूजा सामग्री, फूल-मालाएं, सरसों का तेल, काले तिल एवं धार्मिक वस्तुओं की दुकानों पर खरीदारी तेज हो गई है। पूरे क्षेत्र में भक्तिमय वातावरण एवं धार्मिक उल्लास का माहौल बना हुआ है।



