RAJASTHAN: सरकार के पास पर्याप्त बैड, लेकिन ऑक्सीजन पहुंच के लिए टैंकरों की कमी

ऑक्सीजन की कमी से जूझ रहा प्रदेश, केन्द्र से मांगी मदद

oxygen की कमी के चलते कोटपूतली में वेंटिलेंटर की उपयोगिता शून्य

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न्यूज चक्र, कोटपूतली। कोरोना महामारी की स्थिति को प्रदेश के चिकित्सा मंत्री के इस बयान से समझा जा सकता है कि ‘ राजस्थान ऑक्सीजन की कमी के साथ ही विभिन्न सुदूर स्थानों से ऑक्सीजन उठाव को लेकर टैंकरों की कमी और अन्य परेशानियों से जूझ रहा है, लेकिन राजस्थान ने किसी भी राज्य के टैंकरों को प्रदेश में रोकने का प्रयास नहीं किया है। आपको बता दें कि रविवार शाम 6 बजे तक चिकित्सा विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार प्रदेश के 7 जिलों में ऑक्सीजन बैड की उपलब्धता खत्म हो गई थी। वहीं 10 जिलों में ऑक्सीजन वाले आईसीयू बैड की उपलब्धता खत्म हो चुकी थी। यहां तक कि 17 जिलों की अस्पतालों में बिना ऑक्सीजन वाले बैड की उपलब्धता भी खत्म हो चुकी थी। लेकिन इन सबके बीच प्रदेश की अस्पतालों में 6120 सामान्य बैड, 1666 ऑक्सीजन वाले बैड, 234 आईसीयू बैड बिना वेंटिलेटर के और 131 आईसीयू बैड वेंटिलेटर व्यवस्था के साथ उपलब्ध हैं।

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प्रदेश के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री डॉ. रघु शर्मा ने कहा है कि राज्य के पास ऑक्सीजन के उठाव के लिए मात्र 23 टैंकर ही उपलब्ध हैं। चिकित्सा मंत्री ने कहा है कि केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष जो तथ्य प्रस्तुत किए हैं, उसके मुताबिक देश में 2416 क्रयोजेनिक टैंकर उपलब्ध हैं। इनमें से राजस्थान के पास उपलब्ध टैंकरों की संख्या मात्र 25 ही हैं, इनमें भी केवल 23 ही क्रियाशील हैं। इस हिसाब से राजस्थान के पास देश के कुल टैंकरों का केवल एक प्रतिशत ही उपलब्ध है। प्रदेश में एक्टिव केसेज की संख्या को देखते हुए, बर्नपुर, कलिंगनगर, जामनगर, पानीपत एवं भिवाड़ी जैसे सुदूर स्थानों से प्रतिदिन लगातार ऑक्सीजन परिवहन के लिए राजस्थान को तत्काल कम से कम 54 अतिरिक्त टैंकरों की आवश्यकता है।

कोटपूतली जिला अस्पताल की फूलने लगी सांस

इधर कोटपूतली में भी ऑक्सीजन को लेकर हालात विचारणीय बने हुए हैं। अस्पताल के पीएमओ डाॅ. अश्विनी गोयल ने बताया है कि मरीजों के दवाब को देखते हुए 30 oxygen सिलेण्डरों की आवश्यकता है, जबकि अभी 10-11 सिलेण्डर ही उपलब्ध हो पा रहे हैं।
हमने आपको यह आंकड़े और यह खबर इसलिए दिखाई, ताकि आप यह समझ सकें कि कोरोना की चेन को तोड़ने के लिए हमें घर पर ही रहना जरूरी है। क्योंकि सरकार के तमाम प्रयासों के बावजूद अस्पतालों में कोरोना संक्रमितों की भीड़ बढ़ रही है। और जैसा कि प्रदेश के मुख्यमंत्री ने कहा कि कोरोना को अस्पताल में नहीं, घर पर रहकर ही जीता जा सकता है। इसलिए सरकार द्वारा जारी कोरोना गाईडलाइन का पालन करें। मास्क लगाकर रखें, स्वस्थ रहें।

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  • Vikas Verma

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