जिले के बानसूर क्षेत्र के ग्राम नांगल भावसिंह निवासी किसान परिवार से आने वाले निशांत कुमार ने संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) 2025 की परीक्षा में ऑल इंडिया 899वीं रैंक प्राप्त कर क्षेत्र का नाम रोशन किया है। उनकी इस उपलब्धि पर ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने उनका साफा व माला पहनाकर भव्य स्वागत और अभिनंदन किया।

इसी क्रम में कांग्रेस एससी विभाग के जिलाध्यक्ष, पूर्व पार्षद एवं कांग्रेस नेता तारा पूतली ने भी निशांत कुमार का माला व साफा पहनाकर स्वागत किया तथा उन्हें बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर का चित्र भेंट कर सम्मानित किया। इस अवसर पर तारा पूतली ने कहा कि यदि इरादे मजबूत हों और मेहनत सच्ची हो तो हर सपना साकार हो सकता है। उन्होंने कहा कि निशांत की सफलता केवल एक परीक्षा में जीत नहीं, बल्कि संघर्ष, धैर्य, मेहनत और अपने सपनों पर अटूट विश्वास की मिसाल है। सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने अपने लक्ष्य से समझौता नहीं किया और आज अपनी मेहनत से पूरे क्षेत्र का गौरव बढ़ाया है।

वहीं कांग्रेस पर्यावरण संरक्षक प्रकोष्ठ के प्रदेश महासचिव रूप स्वामी ने भी निशांत के घर पहुंचकर उन्हें माला व साफा पहनाकर स्वागत किया और उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं। इस दौरान अभिषेक आर्य, राकेश कुमार, दीपक आर्य सहित कई लोग मौजूद रहे।

निशांत कुमार का सपना बचपन से ही सिविल सर्वेंट बनने का था, लेकिन उनके जीवन में संघर्षों की कमी नहीं रही। जब वह मात्र दो वर्ष के थे, तभी उनके पिता स्व. गैंदाराम का निधन हो गया था। इसके बाद परिवार पर आर्थिक और सामाजिक जिम्मेदारियों का बोझ आ गया, लेकिन कठिन परिस्थितियों के बावजूद निशांत ने अपने सपनों को टूटने नहीं दिया।

निशांत सात भाई-बहनों में सबसे छोटे हैं। उनके बड़े भाई नीतीश कुमार ने इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है और वर्तमान में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण निशांत को पढ़ाई के साथ-साथ संघर्ष भी करना पड़ा। उन्होंने कुछ समय तक एक निजी विद्यालय में अध्यापन कार्य भी किया, ताकि परिवार का सहयोग कर सकें और अपनी पढ़ाई जारी रख सकें।

निशांत की सफलता की सबसे खास बात यह रही कि उन्होंने बिना किसी कोचिंग के केवल सेल्फ स्टडी के दम पर यूपीएससी जैसी कठिन परीक्षा में सफलता प्राप्त की। खेतों में काम करने के साथ-साथ उन्होंने लगातार अपनी पढ़ाई जारी रखी और कड़ी मेहनत करते रहे।
इस मुकाम तक पहुंचने का रास्ता आसान नहीं था। निशांत को करीब आठ प्रतियोगी परीक्षाओं में असफलता का सामना करना पड़ा। यह उनका तीसरा यूपीएससी प्रयास था। इससे पहले दो बार वह मेन्स परीक्षा तक पहुंचे, लेकिन सफलता नहीं मिल सकी। लगातार असफलताओं के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और आखिरकार अपने सपने को साकार कर दिखाया।
दिलचस्प बात यह है कि जब यूपीएससी का परिणाम घोषित हुआ, उस समय निशांत खेत में सरसों की कटाई कर रहे थे। जैसे ही सफलता की खबर मिली, परिवार में खुशी की लहर दौड़ गई। बेटे की सफलता की खबर सुनकर उनकी माता भावुक हो गईं और कहा कि मेरे बेटे ने परिवार और गांव का नाम रोशन कर दिया।
निशांत कुमार ने अपनी सफलता का श्रेय अपनी माता और गुरुजनों को दिया है। उनकी यह उपलब्धि पूरे क्षेत्र के युवाओं के लिए एक बड़ी प्रेरणा बन गई है।



