सरकारी विद्यालयों में बाहरी लोगों के प्रवेश और विद्यार्थियों से जुड़ी फोटो-वीडियोग्राफी पर अनुमति संबंधी नए दिशा-निर्देशों को लेकर सुरेंद्र मीणा बालेटा ने राज्य सरकार से पुनर्विचार की मांग की है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों की सुरक्षा सर्वोपरि है, लेकिन सरकारी स्कूलों की व्यवस्थाओं पर सामाजिक निगरानी और जिम्मेदार मीडिया की भूमिका को कमजोर करना उचित नहीं होगा। मीणा ने कहा कि प्रदेश का आम अभिभावक अपने बच्चे को सरकारी स्कूल में इसलिए भेजता है कि वहां उसे सुरक्षित वातावरण के साथ गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और आवश्यक सुविधाएं मिलें।

यदि विद्यालय में छत टपकती है, कक्षा जर्जर है, शौचालय की स्थिति खराब है, शिक्षक कम हैं या अन्य मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं, तो इन समस्याओं को सामने लाना अपराध नहीं बल्कि व्यवस्था को सुधारने की प्रक्रिया का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि मीडिया और जागरूक नागरिकों ने समय-समय पर सरकारी संस्थानों की समस्याओं को सामने रखकर प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया है। कई बार ऐसी खबरों के बाद ही जिम्मेदार अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर सुधारात्मक कदम उठाए हैं। ऐसे में प्रवेश और कवरेज की प्रक्रिया इतनी कठोर नहीं होनी चाहिए कि बच्चों से जुड़ी वास्तविक समस्याएं समाज तक पहुंच ही न सकें।

सुरेंद्र मीणा ने कहा कि विद्यार्थियों की निजी जानकारी, तस्वीरों और वीडियो के दुरुपयोग पर रोक लगाना पूरी तरह उचित है। लेकिन बाल सुरक्षा और सरकारी व्यवस्था की पारदर्शिता दो अलग विषय हैं। दोनों के बीच स्पष्ट संतुलन बनाकर ही प्रभावी नियम तैयार किए जा सकते हैं। उन्होंने शिक्षा मंत्री और विभाग से अपील करते हुए कहा कि आदेश को लेकर मीडिया, अभिभावकों, शिक्षकों और जागरूक नागरिकों के साथ संवाद किया जाए तथा वर्तमान आदेश वापस लेकर संशोधित और स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएं।
मीणा ने कहा कि स्कूल के दरवाजे बंद करने से समस्याएं खत्म नहीं होतीं। समस्याएं तब खत्म होती हैं, जब सरकार उन्हें स्वीकार कर समाधान करती है। उन्होंने कहा कि राजस्थान के बच्चों को सुरक्षित, गुणवत्तापूर्ण और सुविधायुक्त शिक्षा देना सरकार की जिम्मेदारी है। इसलिए सरकार को आईना दिखाने वालों से नाराज होने के बजाय आईने में दिखाई देने वाली कमियों को सुधारना चाहिए। यही विद्यार्थियों, अभिभावकों और आमजन के हित में वास्तविक शिक्षा सुधार होगा।