कोटपूतली-बहरोड़ जिला कारागृह में बंदियों का विरोध, मांगों को लेकर भूख हड़ताल

कोटपूतली में गोपालपुरा रोड स्थित जिला कारागृह में बंदियों द्वारा अपनी मांगों को लेकर विरोध प्रदर्शन और भूख हड़ताल किए जाने का मामला सामने आया है। घटनाक्रम के दौरान करीब आधा दर्जन बंदियों के घायल होने की सूचना है। इनमें से चार को जेल परिसर में प्राथमिक उपचार दिया गया, जबकि दो बंदियों को उपचार के लिए राजकीय बीडीएम जिला अस्पताल भेजा गया।

कोटपूतली-बहरोड़ जिला कारागृह में बंदियों का विरोध, मांगों को लेकर भूख हड़ताल
कोटपूतली-बहरोड़ जिला कारागृह में बंदियों का विरोध, मांगों को लेकर भूख हड़ताल

जानकारी के अनुसार जीतूसिंह राजपूत (27) निवासी पांछूडाला और प्रवीण सैनी (18) निवासी मोहल्ला बड़ाबास को अस्पताल भेजा गया, जहां उनका उपचार जारी बताया गया है।

कोटपूतली-बहरोड़ जिला कारागृह में बंदियों का विरोध, मांगों को लेकर भूख हड़ताल
कोटपूतली-बहरोड़ जिला कारागृह में बंदियों का विरोध, मांगों को लेकर भूख हड़ताल

जेल अधीक्षक मानाराम गर्ग के अनुसार कुछ बंदी भोजन के साथ सलाद के रूप में कच्ची प्याज और मिर्च उपलब्ध कराने की मांग कर रहे थे। जेल प्रशासन का कहना है कि यह मांग जेल मैन्युअल में निर्धारित व्यवस्था का हिस्सा नहीं है। मांग पूरी नहीं होने से नाराज कुछ बंदियों ने विरोध शुरू कर दिया और कुछ बंदी भूख हड़ताल पर बैठ गए।

अधीक्षक के अनुसार घायल होने वाले बंदियों ने किसी धारदार हथियार का इस्तेमाल नहीं किया, बल्कि सेविंग रेजर आदि से खुद को चोट पहुंचाई। जेल प्रशासन का कहना है कि परिसर में कोई धारदार हथियार नहीं मिला है।

घटना की जानकारी मिलने पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव नीलम मीणा, डीएसपी मदनलाल जैफ, तहसीलदार रामधन गुर्जर और सरूण्ड थाना प्रभारी यशपाल सिंह मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने बंदियों से बातचीत कर स्थिति को शांत करने और उनकी समस्याएं सुनने का प्रयास किया।

मामले की गंभीरता को देखते हुए जयपुर से जेल प्रशासन के उच्चाधिकारी भी मौके पर पहुंचे हैं। प्रशासन और पुलिस की टीमें घटनाक्रम की जांच में जुटी हैं।

जेल प्रशासन की ओर से सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की जा रही है। साथ ही बंदियों के पास रेजर जैसी वस्तुएं किस प्रकार पहुंचीं और घटना के दौरान सुरक्षा व्यवस्था में कोई चूक हुई या नहीं, इसकी भी जांच की जा रही है। प्रशासन की प्राथमिकता फिलहाल स्थिति को पूरी तरह नियंत्रण में रखने और बंदियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की है।

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