कोटपूतली-बहरोड़ जिले के नारायणपुर में ‘कुर्सी विवाद’: एसडीएम की सीट पर विधायक

कोटपूतली (राजेश कुमार हाडिया)। जिले के नारायणपुर से एक तस्वीर ने प्रशासनिक मर्यादाओं और प्रोटोकॉल को लेकर नई बहस छेड़ दी है। एसडीएम कार्यालय में आयोजित ब्लॉक स्तरीय अधिकारियों की बैठक के दौरान स्थानीय विधायक देवीसिंह शेखावत एसडीएम की आधिकारिक कुर्सी पर बैठे नजर आए, जबकि एसडीएम दिनेश शर्मा उनके पास एक सामान्य अधिकारी की तरह बैठे दिखाई दिए।

कोटपूतली-बहरोड़ जिले के नारायणपुर में ‘कुर्सी विवाद’: एसडीएम की सीट पर विधायक

यह दृश्य सामने आते ही लोगों में चर्चा का विषय बन गया। प्रशासनिक नियमों के अनुसार किसी भी सरकारी बैठक में संबंधित अधिकारी की कुर्सी पर वही अधिकारी बैठता है, जबकि जनप्रतिनिधियों के लिए अलग व्यवस्था की जाती है। ऐसे में इस घटना को प्रोटोकॉल के उल्लंघन के रूप में देखा जा रहा है।

कोटपूतली-बहरोड़ जिले के नारायणपुर में ‘कुर्सी विवाद’: एसडीएम की सीट पर विधायक

बताया जा रहा है कि बैठक में विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद थे और क्षेत्रीय मुद्दों पर चर्चा हो रही थी। इसी दौरान विधायक द्वारा एसडीएम की कुर्सी ग्रहण करने का मामला सामने आया, जिसने ‘सत्ता बनाम प्रशासन’ की स्थिति पर सवाल खड़े कर दिए।

नारायणपुर में ‘कुर्सी विवाद’: एसडीएम की सीट पर विधायक

इस मामले पर विधायक देवीसिंह शेखावत का कहना है, “मैं जनसुनवाई की अध्यक्षता कर रहा था, इसलिए उस कुर्सी पर बैठा। मेरा उद्देश्य केवल जनता की समस्याओं का समाधान करना था।”

वहीं प्रशासनिक हलकों में इस घटना को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। जानकारों का मानना है कि “जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच संतुलन और मर्यादा बनाए रखना जरूरी है, ताकि व्यवस्था की गरिमा बनी रहे।”

इस घटना ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या जनसुनवाई की अध्यक्षता करने के नाम पर प्रशासनिक प्रोटोकॉल को नजरअंदाज किया जा सकता है? साथ ही यह भी चर्चा में है कि क्या अधिकारियों पर किसी प्रकार का दबाव था या यह केवल औपचारिकता में हुई चूक थी।

फिलहाल यह तस्वीर सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है और आमजन के बीच प्रशासनिक व्यवस्था की कार्यप्रणाली को लेकर नई बहस को जन्म दे रही है।

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