कोटपूतली बहरोड खाद्य विभाग की कार्रवाई। 135 किलो खाद्य सामग्री नष्ट। त्योहार की मिठास में मिलावट का खतरा !

बहरोड़ में खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्रवाई, रंग के इस्तेमाल की शिकायत पर जांच; मिल्क केक, कचौरी और जलेबी के नमूने लिए
कोटपूतली-बहरोड़, 16 अक्टूबर। त्योहारों पर घर में मिठाइयां आएं, मेहमानों का स्वागत हो और परिवार के चेहरे पर खुशियां खिलें, यही तो हमारी परंपरा है। लेकिन अगर इसी मिठास में सेहत के लिए खतरा छिपा हो, तो खुशियों का यह स्वाद चिंता में बदल सकता है। चमकदार लाल जलेबी और गहरे हरे रंग की मटर देखकर मन ललचा सकता है, लेकिन सवाल यह है कि इनका आकर्षक रंग कहीं हमारी सेहत पर भारी तो नहीं पड़ रहा?
त्योहारी सीजन में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता को लेकर इसी चिंता के बीच कोटपूतली-बहरोड़ जिले के बहरोड़ में खाद्य सुरक्षा विभाग ने कार्रवाई की। जिला कलेक्टर अपर्णा गुप्ता के निर्देश पर की गई इस कार्रवाई में रंग के अधिक इस्तेमाल से तैयार लगभग 135 किलोग्राम खाद्य सामग्री नष्ट करवाई गई। इनमें करीब 60 किलोग्राम जलेबी, 50 किलोग्राम चाशनी और 25 किलोग्राम हरी मटर शामिल हैं।

शिकायत पहुंची तो हरकत में आया विभाग
बहरोड़ की सब्जी मंडी में हरी मटर में रंग के इस्तेमाल को लेकर 181 पोर्टल पर शिकायत प्राप्त हुई थी। शिकायत के आधार पर खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने मौके पर कार्रवाई की। साथ ही त्योहारी सीजन को देखते हुए विभिन्न खाद्य प्रतिष्ठानों का निरीक्षण भी किया गया।
इस दौरान मैसर्स बाबू मिष्ठान भंडार से मिल्क केक तथा मैसर्स गोपी कचौरी से कचौरी और जलेबी के नमूने लिए गए। कार्रवाई के दौरान अधिक मात्रा में रंग का प्रयोग कर तैयार की गई जलेबी और चाशनी तथा रंग के इस्तेमाल वाली हरी मटर को जनहित में नष्ट करवाया गया।
यह कार्रवाई केवल खाद्य सामग्री नष्ट करने तक सीमित नहीं है, बल्कि उपभोक्ताओं के लिए एक जरूरी संदेश भी है कि खाने-पीने की वस्तुओं में दिखने वाली चमक और आकर्षक रंग हमेशा गुणवत्ता की गारंटी नहीं होते।

त्योहार की मिठास में सेहत से समझौता क्यों?
त्योहारों पर मिठाइयों और अन्य खाद्य पदार्थों की मांग बढ़ जाती है। ऐसे में उपभोक्ताओं को भी सजग रहने की जरूरत है। खाद्य पदार्थों में अनावश्यक या निर्धारित मानकों से अधिक रंग का इस्तेमाल स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है। इसलिए केवल रंग, चमक या दिखावट देखकर किसी खाद्य सामग्री को अच्छी गुणवत्ता वाला नहीं मान लेना चाहिए।
खाद्य सुरक्षा विभाग के अभिहित अधिकारी एवं मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. आशीष सिंह शेखावत ने बताया कि खाद्य पदार्थों में रंग के अनावश्यक अथवा निर्धारित मानकों से अधिक प्रयोग को ध्यान में रखते हुए कार्रवाई की गई है। निरीक्षण के दौरान खाद्य सुरक्षा एवं गुणवत्ता संबंधी कमियां मिलने पर संबंधित प्रतिष्ठानों को इम्प्रूवमेंट नोटिस जारी कर आवश्यक सुधार करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
नमूनों की रिपोर्ट बताएगी गुणवत्ता की स्थिति
विभाग की ओर से लिए गए खाद्य नमूनों को जांच के लिए खाद्य प्रयोगशाला, जयपुर भेजा गया है। रिपोर्ट आने के बाद खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के प्रावधानों के तहत नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। जांच रिपोर्ट आने से पहले नमूनों की गुणवत्ता के संबंध में अंतिम निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
कार्रवाई के दौरान खाद्य सुरक्षा अधिकारी शशिकांत शर्मा और नेहा शर्मा मौजूद रहे।
उपभोक्ता भी रहें सतर्क
त्योहार खुशियां बांटने का अवसर हैं, लेकिन इन खुशियों की बुनियाद सुरक्षित भोजन पर ही टिकी होती है। मिठाई खरीदते समय उसकी असामान्य चमक, रंग और गुणवत्ता पर ध्यान दें। खुले खाद्य पदार्थ खरीदते समय साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें और किसी खाद्य सामग्री पर संदेह होने पर संबंधित विभाग में शिकायत करें।
याद रखिए, त्योहार की असली मिठास मिठाई के रंग में नहीं, परिवार की सेहत और अपनों की मुस्कान में है।
