कोटपूतली (राजेश कुमार हाडिया)। भारत 15 अगस्त 1947 को स्वतंत्र हुआ था और देश को आजाद हुए लगभग 78 वर्ष बीत चुके हैं। अगस्त 2026 में देश अपनी आजादी के 79 वर्ष पूरे करेगा, लेकिन यह विडंबना ही है कि आज भी समाज के कुछ हिस्सों में दलित समुदाय को घोड़ी चढ़ने जैसी परंपराओं से रोका जाता है। कोटपूतली-बहरोड़ जिले के ग्राम खरखड़ा (बामनवास) में सामने आया ताजा घटनाक्रम इसी कड़वी सच्चाई को उजागर करता है।

शनिवार को सुरेन्द्र कुमार मेघवाल की बिंदौरी कड़ी पुलिस सुरक्षा के बीच निकाली गई। जानकारी के अनुसार, विवाह से पूर्व कुछ लोगों द्वारा सार्वजनिक मार्ग से घोड़ी पर बिंदौरी निकालने का विरोध किया गया और गंभीर परिणाम भुगतने की धमकियां दी गईं। इसके बाद परिजनों ने पुलिस प्रशासन से सुरक्षा की मांग की।

मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई की। बासदयाल थानाधिकारी रजनी कुमारी मय जाप्ते के साथ मौके पर तैनात रहीं। पूरे गांव में पुलिस का कड़ा पहरा रहा और माहौल किसी छावनी जैसा नजर आया।

शाम करीब 4:30 बजे शुरू हुई बिंदौरी में दूल्हे को घोड़ी पर बैठाकर डीजे के साथ पूरे गांव में घुमाया गया। इस दौरान महिलाएं, रिश्तेदार और मित्रगण नाचते-गाते आगे बढ़ते रहे। खास बात यह रही कि कई लोग हाथों में संविधान की प्रति और डॉ. भीमराव आंबेडकर के छायाचित्र लेकर सामाजिक समानता और अधिकारों का संदेश दे रहे थे। पूरे आयोजन की वीडियोग्राफी भी करवाई गई, ताकि किसी भी स्थिति में साक्ष्य उपलब्ध रह सके। लगभग एक घंटे बाद बारात भांकरी निवासी रामकिशन के घर के लिए रवाना हुई, जहां वधू सरोज के साथ विवाह संपन्न होना था।

इस दौरान दिल्ली पुलिस के जवान सरजीत बोपिया, सामाजिक कार्यकर्ता बलवंत मीणा, कांग्रेस एससी विभाग के जिलाध्यक्ष तारा पूतली, पूर्व पार्षद उमेश आर्य, सामाजिक कार्यकर्ता राजेश कुमार हाडिया, बसपा जिला प्रभारी दीपचंद आर्य एवं संवैधानिक विचार मंच से गीगराज जोड़ली सहित अनेक सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि मौके पर पहुंचे और पीड़ित परिवार के समर्थन में खड़े नजर आए।

सामाजिक कार्यकर्ता नित्येन्द्र मानव ने मौके पर पहुंचकर पूरे घटनाक्रम पर नजर रखते हुए कहा कि यह केवल एक परिवार का मामला नहीं, बल्कि सामाजिक समानता और संविधान की गरिमा से जुड़ा विषय है। उन्होंने स्पष्ट किया कि समाज में बराबरी का अधिकार केवल कागजों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उसे जमीन पर भी लागू करना जरूरी है।

वहीं संवैधानिक विचार मंच संस्थापक गीगराज जोड़ली ने भी मजबूती से अपनी बात रखते हुए कहा कि इस तरह की घटनाएं सामाजिक सोच में बदलाव की आवश्यकता को दर्शाती हैं। उन्होंने कहा कि संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकारों का सम्मान करना हर नागरिक की जिम्मेदारी है और किसी भी प्रकार का भेदभाव लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।

तारा पूतली ने भी कहा कि संविधान सभी को समान अधिकार देता है और ऐसी घटनाएं समाज के लिए चेतावनी हैं। वहीं दीपचंद आर्य ने प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने की आवश्यकता जताई।
जिला पुलिस अधीक्षक सतवीर सिंह के निर्देशन में पुलिस की सतर्कता और प्रभावी प्रबंधन के चलते बिंदौरी शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुई, जिस पर परिजनों और सामाजिक संगठनों ने प्रशासन का आभार व्यक्त किया।
यह पूरा घटनाक्रम एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करता है कि आजादी के दशकों बाद भी सामाजिक समानता की राह में कई चुनौतियां बाकी हैं, लेकिन जागरूक समाज और सजग प्रशासन के प्रयासों से बदलाव की उम्मीद जरूर जगी है।



